पुष्कर में दिव्यांगों की राष्ट्रीय स्तर की कबड्डी प्रतियोगिता सम्पन्न, 10 राज्यों के 150 खिलाडिय़ों ने भाग लिया



अजमेर : पुष्कर के होटल पुष्कर हेरिटेज के खेल मैदान पर 29 दिसंबर को दिव्यांगजनों की कबड्डी की तीन दिवसीय राष्ट्रीय प्रतियोगिता सम्पन्न हुई। इस प्रतियोगिता का आयोजन स्पोर्ट्स कंट्रोल बोर्ड ऑफ इंडिया फार द डिसेबल की ओर से किया गया। 

इस संस्था की राष्ट्रीय अध्यक्ष जयपुर की निर्मला रावत है। निर्मला की उम्र 79 वर्ष है। इस उम्र में जब किसी बुजुर्ग को स्वयं संभालने वाले की जरुरत होती है तब निर्मला रावत चुस्त दुरस्त रह कर 150 दिव्यांगों की कबड्डी प्रतियोगिता करवा रही हैं। 

निर्मला का कहना है कि उनमें यह जोश और उत्साह दिव्यांगों की हिम्मत और ऊर्जा देख कर है। दिव्यांगों को यदि अवसर मिले तो वे अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर सकते हैं। दिव्यांगों के जज्बे को देखते हुए ही पुष्कर में राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता आयोजित की गई। 

इस प्रतियोगिता में राजस्थान सहित महाराष्ट्र, पंजाब, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, मुंबई, झारखंड बिहार उत्तर प्रदेश उड़ीसा आदि राज्यों की टीमों ने भाग लिया। करीब 150 खिलाडिय़ों ने पूरे जज्बे के साथ कबड्डी खेली। 29 दिसंबर को अंतिम दिन सभी खिलाडिय़ों को पुष्कर के रेतीले भूभाग में ऊंट की सवारी करवाई गई।

निर्मला रावत ने कहा - “पुष्कर में दिव्यांगों की राष्ट्रीय स्तर की कबड्डी प्रतियोगिता सम्पन्न हुई जिसमें 10 राज्यों के 150 खिलाडिय़ों ने भाग लिया।

 निर्मला रावत ने बताया - फ़रवरी में दिल्ली में दिव्यांग टेबल टेनिस और अजमेर में नेशनल कबड्डी चैंपियनशिप का होगा आयोजन होगा । निर्मला रावत ने कहा कि आज खिलाड़ी अपनी दिव्यांगता को अवसर के तौर पर देख रहे हैं। हाल में पैरा ओलंपिक में जिस तरह भारत के दिव्यांगों ने पदक जीते हैं, उससे उनमें और उत्साह है। 

संस्था की राष्ट्रीय अध्यक्ष निर्मला रावत ने बताया कि खेल मंत्रालय दिव्यांगों के खेलों को लेकर गंभीर है। मंत्रालय का जोर योगाभ्यास पर भी है ताकि दिव्यांग खिलाड़ी भी स्वस्थ्य रह सके। निर्मला ने बताया कि अंतर्राष्ट्रीय मंच पर भारत के दिव्यांग खिलाडिय़ों की अलग ही पहचान है। 

पुष्कर में 150 दिव्यांगों की कबड्डी प्रतियोगिता करवाने वाली 79 वर्षीय निर्मला रावत ने बताया कि 1963 में उन्होंने एनसीसी की बेस्ट कैडेट्स का सर्टिफिकेट हासिल किया और दिल्ली में 26 जनवरी को होने वाली परेड में भाग लिया। तब उन्हें तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू से मुलाकात करने का अवसर भी मिला।

1964 में विवाह के बाद वे स्विट्जरलैंड चली गई थी, लेकिन उनके पति ने भी उनकी खेल भावना का ख्याल रखा। अब वे चाहती हैं कि भारत में ही रह कर दिव्यांगजनों को खेलों के लिए प्रेरित करुं। समाज में भी दिव्यांगजनों को लेकर सकारात्मक माहौल हे। आने वाले दिनों में खेलों की अन्य प्रतियोगिताएं भी करवाई जाएंगी।



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