सिरसा: राजकीय नेशनल महाविद्यालय, सिरसा में 24 सितंबर को ‘राष्ट्रीय सेवा योजना दिवस’ उत्साह और गरिमामयी माहौल में मनाया गया। इस मौके पर महाविद्यालय परिसर में एनएसएस दिवस समारोह के साथ एक विशेष पौधारोपण अभियान भी आयोजित किया गया। पूरा कार्यक्रम प्राचार्या डॉ. अनीता सिंह के मार्गदर्शन और एनएसएस प्रभारी डॉ. जीतराम शर्मा के संयोजन में संपन्न हुआ।

कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए प्राचार्या डॉ. अनीता सिंह ने एनएसएस के आदर्श वाक्य ‘नॉट मी बट यू’ (स्वयं से पहले आप) को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सेवा योजना विद्यार्थियों में अनुशासन, सेवा भावना, नेतृत्व क्षमता और सामाजिक दायित्वों के प्रति संवेदनशीलता का संचार करती है। स्वयंसेवकों को बधाई देते हुए उन्होंने कहा कि पर्यावरण का संतुलन बनाए रखने और भावी पीढ़ियों के लिए स्वच्छ परिवेश तैयार करने हेतु पौधारोपण आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। साथ ही उन्होंने सभी से रोपे गए पौधों की नियमित देखभाल का संकल्प लेने का आह्वान किया।

एनएसएस प्रभारी डॉ. जीतराम शर्मा ने एनएसएस के गौरवशाली इतिहास और समाज निर्माण में स्वयंसेवकों की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि इस दिवस को सार्थक बनाने के लिए परिसर में फलदार, छायादार एवं औषधीय पौधे रोपे गए हैं। तीनों श्रेणियों का यह मिश्रण बताता है कि अभियान केवल प्रतीकात्मक नहीं था, बल्कि परिसर को लंबे समय तक हरा-भरा, छायादार और उपयोगी बनाने की सोच के साथ किया गया।

वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. सुरेंद्र कुमार, एनएसएस कार्यक्रम अधिकारी डॉ. मंजू कम्बोज, डॉ. भारती शर्मा, प्रो. रमेश सोनी, डॉ. सरबजीत कौर एवं डॉ. दिनेश सहित अनेक प्राध्यापकों ने भी पौधारोपण किया। बड़ी संख्या में एनएसएस स्वयंसेवकों और छात्र-छात्राओं ने उत्साह से भाग लेकर अभियान को सफल बनाया।

राष्ट्रीय सेवा योजना की शुरुआत 24 सितंबर 1969 को महात्मा गांधी के जन्म शताब्दी वर्ष में हुई थी। इसी कारण हर साल यह तारीख देशभर के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में एनएसएस दिवस के रूप में मनाई जाती है। पांच दशक से अधिक पुरानी यह योजना आज भी छात्रों को कक्षा से बाहर निकालकर समाज से जोड़ने का सबसे व्यापक मंच मानी जाती है।

कैंपस पौधारोपण अक्सर एक दिन की फोटो तक सीमित रह जाते हैं और कुछ ही महीनों में पौधे देखभाल के अभाव में सूख जाते हैं। ऐसे में प्राचार्या द्वारा ‘नियमित देखभाल’ के संकल्प पर ज़ोर देना इस आयोजन को अलग बनाता है। जब स्वयंसेवक खुद लगाए पौधों की ज़िम्मेदारी लेते हैं, तो पर्यावरण संरक्षण एक औपचारिक गतिविधि के बजाय व्यक्तिगत प्रतिबद्धता में बदल जाता है। यही ‘नॉट मी बट यू’ की असल भावना है।