Quick Read / Key Highlights

  • पशुपालन मंत्री जोराराम कुमावत ने शनिवार, 26 सितंबर को सचिवालय में मुख्यमंत्री के एसीएस अखिल अरोड़ा से बैठक की।
  • पाली, जालोर, सिरोही, बाड़मेर, जैसलमेर, फलोदी, बालोतरा और जोधपुर जिलों में कम बारिश से फसलों को नुकसान हुआ है।
  • प्रभावित क्षेत्रों में विशेष गिरदावरी कराकर प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत जल्द मुआवजा देने पर चर्चा हुई।
  • चारे की भारी कमी को देखते हुए तुरंत चारा डिपो खोलने की आवश्यकता जताई गई।
  • आम जनता और मवेशियों के लिए पेयजल के पुख्ता और वैकल्पिक इंतजाम पर भी जोर दिया गया।

जयपुर। पश्चिमी राजस्थान में इस साल कमजोर मानसून ने एक साथ तीन मोर्चों पर संकट खड़ा कर दिया है: खेतों में फसल, पशुओं के लिए चारा और लोगों के लिए पीने का पानी। इसी गंभीर स्थिति को लेकर पशुपालन, गोपालन, डेयरी एवं देवस्थान विभाग के कैबिनेट मंत्री जोराराम कुमावत ने शनिवार, 26 सितंबर को शासन सचिवालय में मुख्यमंत्री के अतिरिक्त मुख्य सचिव (एसीएस) अखिल अरोड़ा से मुलाकात की और जोधपुर संभाग के लिए तत्काल राहत कदमों पर चर्चा की।

आठ जिलों में खेती को भारी नुकसान

मंत्री कुमावत ने एसीएस को बताया कि कम बारिश के चलते जोधपुर संभाग के कई जिलों में खेती-किसानी को भारी नुकसान पहुंचा है। उन्होंने खास तौर पर पाली, जालोर, सिरोही, बाड़मेर, जैसलमेर, फलोदी, बालोतरा और जोधपुर जिलों का उल्लेख किया। किसानों को राहत देने के लिए उन्होंने प्रभावित इलाकों में विशेष गिरदावरी कराने पर चर्चा की। उनका कहना था कि गिरदावरी रिपोर्ट के आधार पर पीड़ित किसानों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत जल्द से जल्द उचित मुआवजा दिया जाए, ताकि उन्हें आर्थिक संबल मिल सके।

गिरदावरी क्यों है अहम?

गिरदावरी राजस्व विभाग की वह प्रक्रिया है जिसमें पटवारी खेत-खेत जाकर बोई गई फसल और उसकी स्थिति दर्ज करते हैं। सामान्य गिरदावरी तय समय पर होती है, जबकि विशेष गिरदावरी प्राकृतिक आपदा के बाद नुकसान का आकलन करने के लिए कराई जाती है। मुआवजे और बीमा दावों का आधार यही रिपोर्ट बनती है। इसलिए इसमें जितनी देरी होगी, किसानों तक राहत पहुंचने में उतना ही समय लगेगा।

पशुपालकों की सबसे बड़ी चिंता: चारा

मारवाड़ और थार के इलाकों में पशुपालन केवल सहायक धंधा नहीं, बल्कि लाखों परिवारों की आजीविका की रीढ़ है। फसल खराब होने का सीधा असर चारे की उपलब्धता पर पड़ता है, क्योंकि खेतों से मिलने वाला सूखा चारा ही मवेशियों का मुख्य सहारा होता है। मंत्री कुमावत ने एसीएस को अवगत कराया कि इन जिलों में चारे की भारी कमी है। उन्होंने प्रभावित जिलों में तुरंत चारा डिपो खुलवाने की आवश्यकता जताई, ताकि पशुपालकों को जरूरत के अनुसार आसानी से चारा मिल सके और गोवंश सहित अन्य मवेशियों को बचाया जा सके।

पानी का संकट भी गहराया

कम बारिश ने क्षेत्र के जलस्तर और पेयजल आपूर्ति को भी प्रभावित किया है। मंत्री ने जोर दिया कि आम जनता के साथ-साथ मवेशियों के लिए भी पीने के पानी के संकट का समय रहते समाधान निकाला जाए। उन्होंने प्रशासन से प्रभावित क्षेत्रों में पेयजल के पुख्ता और वैकल्पिक इंतजाम करने पर चर्चा की।

क्यों मायने रखती है यह बैठक?

सितंबर के आखिर में यह मांग इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि मानसून की विदाई के बाद आने वाले महीने पश्चिमी राजस्थान में सबसे कठिन माने जाते हैं। अक्टूबर से गर्मी की शुरुआत तक चारे और पानी की मांग लगातार बढ़ती है। यदि अभी से डिपो और जल आपूर्ति की योजना नहीं बनी, तो पशुधन के पलायन और नुकसान का खतरा बढ़ सकता है।