सांभर झील: पहुंचना नही आसान

सांभर लेक (जयपुर)। सांभर झील में प्रवास कर रहे हंसावरो का जो झूण्ड यहां पर है वह अपने आप को इतना सुरक्षित रखते है कि आम आदमी का तो इनके पास जान सम्भव ही नही है यह झील में ऐसे स्थान पर रहते है जो कि गीले कीचड में लगभग पांच किलोमीटर अन्दर होता है और किसी की जरा आहट भी इनको सचेत कर देती है और इनका झूण्ड तुरन्त वहां से उड जाता है जिससे कोई इनके करीब जाने की सोच भी नही सकता है।

फोटो कैप्शन - सांभर में झील में विचरण करते हंसावर

सांभर झील में यह पक्षी ऐसे गीले दलदले स्थान पर निवास कर रहे है जहां पर जाने के लिए लोगो को लगभग पांच किलोमीटर पैदल दलदल में चलना होगा तथा उस दलदल के बाद लगभग एक से ढेड किलोमीटर घुटनो तक पानी में चलना होगा जब जाकर इनके रहने के स्थान का पता लग पाता है। झील में इतनी अधिक संख्या में पक्षी होते है कि कि कुछ दूर गीले में चलने के बाद इन गुलाबी रंग के पक्षीयो का झूण्ड दिखना शुरू हो जाते थे और लगाता कि किसी ने पानी में गुलाबी रंग की दीवार ही खीच दी हो। यूरोप व चाईना तक से आते है- पक्षीविदो ने बताया कि जो प्रजातियां आज मरी हुई पाई गई है उनमें से अधिकतर प्रजाति यूरोप से लेकर चाईना व अन्य कई देशो से यहां पर प्रवास के लिए आती है, लेकिन फिर भी वन विभाग इस ओर कोई ध्यान नही देता है।
पानी की व्यवस्था हो तो पक्षी रूके ज्यादा समय - सांभर झील में अगर सरकार पानी की व्यवस्था करे तो यहां पर पक्षी संख्या प्रजाति व समय बढ सकता है इनके लिए कुछ कृत्रिम तालाब बनाये जाये या जो पुराने तालाब है उनको सही कराया जाये तथा झील के मध्य कुछ ऐसे स्थान बनाये जहां पर फ्लेमिंगो रह सके तो यह पक्षी यहां पर अधिक समय रूक सकते है।


सांभर झील में फ्लेमिंगो के घोसले।
अन्य फोटोज - आलेख अंशिका श्रीवास्तव


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