कोरोना के बाद न्यूरोलॉजिकल मरीजों के लिए जीवनशैली में बदलाव जरूरी - Sangri Times

SPORTS

कोरोना के बाद न्यूरोलॉजिकल मरीजों के लिए जीवनशैली में बदलाव जरूरी

कोविड 19 के बारे में किए गए कई अध्ध्यनों के अनुसार, यह बीमारी व्यक्ति के फेफड़ों और सांस की नली को बुरी तरह प्रभावित करती है। लेकिन एक तथ्य से लोग अभी भी वाकिफ  नहीं हैं और वह यह है कि यह बीमारी कई मरीजों के मस्तिष्क और नर्वस सिस्टम को भी गहरा नुकसान पहुंचाती है। वहीं लॉकडाउन में ज्यादातर वक्त घर में ही गुजारने के कारण भी लोगों को मस्तिष्क संबंधित समस्याओं से गुजरना पड़ रहा है। कुछ हालिया अध्ध्यन बताते हैं कि कोविड के लगभग 30-40 प्रतिशत मरीजों में न्यूरोलॉजिकल यानी कि मस्तिष्क संबंधी समस्या होने का खतरा है। जिन मरीजों को कोरोना के साथ-साथ मस्तिष्क संबंधी समस्या है, उनमें से अधिकतर मरीजों को स्ट्रोक जैसी गंभीर समस्या से गुजरना पड़ा है। वहीं कुछ मरीजों को बेहोशी की समस्या हुई है। ये सभी समस्याएं सीधा-सीधा नर्वस सिस्टम से जुड़ी हुई हैं।
मस्तिष्क संबंधी समस्या आमतौर पर बुजुर्गों में ज्यादा देखने को मिलती है, जो हाइपरटेंशन, डायबिटीज या कोलेस्ट्रॉल आदि जैसी बीमारियों से पहले से ग्रस्त हैं। इसके अलावा यह समस्या उन बुजुर्गों और युवाओं को भी होती है जो धूम्रपान के आदी हैं। न्यूरोलॉजिकल समस्याओं से ग्रस्त सभी मरीज कोरोना के बाद अपने जीवन को किस प्रकार जीते हैं और क्या खाते हैं, इसका सीधा असर उनके स्वास्थ्य पर पडऩे वाला है। इसलिए ऐसे मरीजों को कोरोना के बाद निम्नलिखित बातों का ख्याल रखना आवश्यक है।
योग और व्यायाम
कम उम्र में होने वाली न्यूरोलॉजिकल समस्याओं के अन्य बड़े कारणों के अलावा शारीरिक निष्क्रियता भी इसका एक मुख्य कारण है। नियमित एक्सरसाइज से न केवल स्वस्थ रहा जा सकता है, बल्कि स्ट्रोक, उच्च रक्तचाप, डायबिटीज और हाई कोलेस्ट्रॉल जैसी कई घातक बीमारियों से भी बचा जा सकता है। योग न सिर्फ  आपको ऊपर से फिट रखता है बल्कि आपको अंदर से भी फिट रखता है। योग मानसिक स्वास्थ्य को भी बेहतर करने में सहायक है। सक्रीय रहने के कई तरीके हैं और उसके लिए आपको नई-नई गतिविधियों में शामिल होने की आवश्यकता है। यदि आप किसी प्रकार का मेडिकेशन ले रहे हैं तो पहले अपने डॉक्टर से परामर्श लें। डॉक्टर द्वारा बताई गई एक्सरसाइज और गितिविधियों को अपने रुटीन में शामिल करें। अच्छी सुविधाओं वाला जिम जॉइन करना एक अच्छा विकल्प है।
धूप देगी राहत
सूरज की रोशनी में ऐसे चमत्कारी गुण होते हैं, जिनके कारण शरीर पर विभिन्न प्रकार की बीमारियों की आशंका कम हो जाती है। इससे न्यूरोलॉजिकल समस्याओं से छुटकारा पाने में मदद मिलती है। धूप डिप्रेशन की समस्या से भी राहत देती है। इसलिए कोरोना के बाद हर रोज सुबह आधा घंटा धूप में जरूर बैठें।
सही आहार
हम जो भी खाते हैं, उसका सीधा असर हमारे स्वास्थ्य पर पड़ता है। इसलिए बीमारी चाहे जो भी हो स्वस्थ, संतुलित और पौष्टिक आहार का सेवन जरूरी है। हरी पत्तेदार सब्जियां, मौसमी फल, हरी सब्जियां, दूध-दही, फाइबर, दाल आदि का सेवन करने से समस्या का असर कम होगा।
डॉक्टर से नियमित जांच
न्यूरो समस्याएं कब गंभीर हो जाएं इसका कोई अंदाजा नहीं है। इसलिए समय-समय पर डॉक्टर से जांच कराना आवश्यक है। इस प्रकार समस्या को नियंत्रण में रखा जा सकता है और साथ ही केवल मेडिकेशन की मदद से इसका उपचार भी संभव है। वहीं लापरवाही दिखाने से रोग गंभीर हो सकता है।
 

डॉ. आदित्य गुप्ता
निदेशक
न्यूरोसर्जरी
अग्रिम इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरो साइंसेस,आर्टेमिस हॉस्पिटल, गुरुग्राम

Sangri Times News से जुड़े अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करे!
लेटेस्ट वीडियो के लिए हमारे YOUTUBE चैनल को विजिट करें.

loading...