जयपुर इंटरनेशनल फिल्म फैस्टिवल के चौथे दिन फिल्मकारों ने शेयर की दिल की बातें, हुई 15 देशों की 32 फिल्मों की स्क्रीनिंग




 जयपुर। पांच दिवसीय जयपुर इंटरनेशल फिल्म के चौथे दिन 15 देशों की 32 फिल्मों की ऑफ लाइन स्क्रीनिंग के बीच फैस्टिवल में आए देश - विदेश के फिल्मकारों ने आपस में दिल की बातें साझा कीं और फिल्म निर्माण में हुए अनुभवों पर रोशनी डाली।

भारत में खंगालने आती  हूं ग्रह, नक्षत्रों और राशियों की दुनिया - जेनेट ग्रोएनेनडा

मैं पिछले 35 बरसों से भारत में यात्राएं कर रही हूं, ग्रहों, मैं यहां नक्षत्रों और राशियों की रहस्यमयी दुनिया को खंगाल रही हूं, और अब यह देश मुझे बिल्कुल अपना महसूस होने लगा है , यह कहना था नीदरलैण्ड्स की फिल्मकार जेनेट ग्रोएनेनडा का। ड्रामायामा फिल्म की निर्देशक जेनेट सहज मुस्कुराहट भरे अंदाज़ में कहती हैं कि वे बचपन के दिनों से ही ग्रह - नक्षत्रों के संसार के प्रति बहुत आकर्षित महसूस करती थीं और यही आकर्षण उन्हें भारत खींच लाया। लम्बे समय से तमिल मंदिरों में खोज - पड़ताल करने वाली जेनेट मानती हैं कि दुनिया में इन ग्रह नक्षत्रों के संकेतों को समझे जाने की ज़रुरत है। जेनेट भारत के नवग्रह मंदिर में इतने समय तक रह चुकी हैं, कि अब वे पर्यटकों और स्थानीय लोगों को इन मंदिरों का इतिहास बता सकती हैं।

वहीं, जेनेट माया मंदिरों के रहस्यमयी इतिहास में भी गहरी दिलचस्पी रखती हैं, जो धीरे धीरे लुप्त हो रहे हैं। नीदरलैण्ड्स से आई जेनेट ने बताया कि जयपुर इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल और इस तरह के समारोहों के ज़रिए वे कोई ऐसा माध्यम बनाना चाहती हैं, जिससे भारत और नीदरलैण्ड्स में फिल्मों का आदान प्रदान हो सके। वहीं, हिन्दी सिनेमा का जिक्र करते हुए जेनेट हंस देती हैं और बताती हैं कि उन्हें भारतीय फिल्में बेहद पसंद हैं, चूंकि वे आपको इमोशनली और साइकोलॉजिकली मूव कर जाती हैं।

 
जिफ के अनुभव को शब्दों में कैसे ज़ाहिर करूं - कौशिक चक्रवर्ती


कोलकाता से जिफ में पहुंचे अभिनेता कौशिक चक्रवर्ती जयपुर इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल की प्रशंसा करते नहीं थकते। फिल्म फिफ्टीएथ एनिवर्सरी में मुख्य किरदार निभाने वाले कौशिक कहते हैं कि फिल्म समारोह में उन्हें जो अनुभव मिला है, अद्भुत है। कोविड की तीसरी लहर की आशंकाओं के बीच भी जिफ जिस सुनियोजित ढंग से आयोजित हुआ है, काबिले तारीफ़ है। कौशिक ने बताया कि उन्होने कई फिल्मों का लुत्फ उठाया, जिसमें उड़िया फिल्म दालचीनी तथा पॉलिश फिल्म लीडर उन्हें बेहद पसंद आई।

कड़ाके की सर्दी में हाइवे पर शूटिंग थी बहुत मुश्किल - शिशिर कुमार साहू

उड़ीसा से पहुंचे फिल्मकार पीनाकी सिंह तथा शिशिर कुमार साहू की फिल्म ‘दालचीनी’ यात्रा के रोमांच और रहस्यों से भरपूर फिल्म है। फिल्म की शूटिंग से जुड़े अनुभवों को याद करते हुए शिशिर बताते हैं कि यह एक ट्रैवल स्टोरी है, और फिल्म हाइवे पर शूट की गई, वह भी कड़ाके की सर्दी में, जो बहुत ही मुश्किल था। शिशिर ने कहा कि इंडिपिंडेंट फिल्ममेकर्स के लिए स्थानीय भाषा में फिल्म बनाना और लोगों तक पहुंचाना आसान नहीं है। वहीं पीनाकी मानती हैं कि जयपुर इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में उनकी फिल्म प्रदर्शित होना सुखद अनुभव रहा और ऐसे फिल्म समारोह उनके लिए उम्मीद के जगमगाते सितारे जैसे हैं।


साधनों की फिक्र छोड़ें और अपनी कहानी लोगों तक पहुंचाए - रविन्द्र केलकर


अग़र आप फिल्म बनाना चाहते हैं, तो अपनी कहानी लोगों तक पहुंचाएं और साधनों की फिक्र ना करें। यह कहना था जिफ में प्रदर्शित हुई फिल्म अ नोमैड रिवर के प्रोड्यूसर और एक्टर रविन्द्र केलकर का। बदलती जलवायु और लुप्त होती नदियों के खतरों को दर्ज करती, आदित्य पटवर्धन निर्देशित फिल्म अ नोमैड रिवर भारत के कई हिस्सों की पड़ताल करती है। रविन्द्र बताते हैं कि इस डॉक्यूमेंट्री फीचर फिल्म को बनाना बहुत मज़ेदार रहा, चूंकि इसे बनाने की प्रक्रिया में उन्होने सद्गुरू जग्गी वासुदेव के सानिध्य में समूचे भारत की यात्रा की। जिफ का जिक्र करते हुए रविन्द्र बताते हैं कि वे यहां लगातार तीसरी बार आए हैं, और यहां आकर उन्हें कई राष्ट्रीय अन्तर्राष्ट्रीय फिल्मकारों, फिल्म निर्माताओं और सिनेमा विशेषज्ञों से बातचीत करने का मौका हासिल हुआ।



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