मंच पर ऐतिहासिक मुशायरे की दास्तां, खुसरो बने गवाह

दिल्ली के एम सईद आलम के निर्देशन में उर्दू नाटक का मंचन
जयपुर। राजस्थान उर्दू अकादमी की ओर से दो दिवसीय उर्दू ड्रामा फेस्टिवल का आगाज शनिवार को जवाहर कला केन्द्र के रंगायन सभागार में हुआ। फेस्ट के पहले दिन दिल्ली के नामचीन निर्देशक एम सईद आलम के निर्देशन में उर्दू नाटक 'गजल का सफर-अमीर खुसरो से फैज अहमद फैज तक' की प्रस्तुति हुई। नाटक की शुरुआत में अमीर खुसरो अपनी मशहूर गजल को गाते हुए नजर आते हैं और उन्हें सुनने के लिए देश के नामचीन कवि मौजूद रहते हैं। इसी दौरान खुसरो साहब गजल की एक लाइन भूल जाते हैं और फिर वे सभी कवि-शायर उस लाइन को पूरी करते हैं। ऐसे में खुसरो साहब सभी से पूछते हैं कि आप मेरी शायरी से कैसे परिचित है, मैं तो उर्दू कविता भी नहीं पढ़ता, मैं तो हिंदवी में पढ़ता हूं। तब उन्हें बताया गया कि हिंदवी को अब हिंदी और उर्दू भाषा में अलग कर दिया गया है। इस दौरान उन्होंने भाषाओं पर कटाक्ष भी किया और हिंदवी को बांटने पर आपत्ति भी जताई। 
इसके बाद मुशायरे की शुरुआत होते है, जिसमें ऐतिहासिक शायक कलाम पढ़ते हैं। सबसे पहले परवीन शाकिर 'कैसे कह दूं की मुझे छोड़ दिया है उसने, बात तो सच है मगर बात है रुसवाई की' सुनाते हुए तालियां बटोरते हैं। इसके बाद फैज, जोश, इकबाल, अकबर इल्हाबादी, दाग दहलवी, मीर अनीश, मिर्जा गालिब, मीर तकी मीर, वलीद अकनी और अमीर खुसरो अपनी रचनाएं पढ़ते हैं। 

नाटक में शामिल कलाकार
नाटक में जाने-माने अभिनेता अभिनव चतुर्वेदी अमीर खुसरो के किरदार में मंच पर नजर आए। इनके साथ आरफा नुरी, अनस फैजी, जावेद हसन, वामिक जेया, सुमित भारद्वाज, आर्यन कुमार, एम सईद आलम, सईद ताजिया, संदीप पेहवा, राहुल पासवान, भूमि सिराज ने अभिनय किया। म्यूजिक अभिनव चतुर्वेदी का रहा। 

'गजल तारीख के आईने में' 
कार्यक्रम में रवीन्द्र मंच प्रबंधक शिप्रा शर्मा ने 'गजल तारीख के आईने में'  विषय पर की-नोट एड्रेस पेश किया। उन्होंने कहा कि उर्दू जबान को बोलना, सुनना, पढऩा और सीखना इससे मोहब्बत करने जैसा है। यह जुबान सिर्फ ख्यालों की अदायगी और कम्यूनिकेशन का माध्यम ही नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति की जीती जागति तस्वीर है। 

थिएटर में ऑडियंस की रसीद सामने ही मिल जाती है
जाने-माने अभिनेता अभिनव चतुर्वेदी ने बताया कि एम सईद आलम ने इस नाटक की स्क्रिप्ट लिखी है, उन्हें यह पता था कि मैंने उर्दू की तालिम ली है। ऐसे में उन्होंने मुझे नाटक से जोड़ा। यह मेरे लिए चैलेंज की तरह था, जिसके जरिए ऐसी शक्सियत को सामने लाना था, जिसके शब्दों के सम्मोहन से हर कोई जुड़ जाता है। हमने इसके लिए खूब तैयारी की और कोरोना काल में इसकी एक वर्चुअल प्रस्तुति भी दी। मैं थिएटर को सबसे नजदीक पाता हूं, क्योंकि इसमें ऑडियंस के रिएक्शन सामने ही नजर आते हैं। हमें ऑडियंस की रसीद तालियों के रूप में मिलती है। मैं हमेशा जिस भी प्रोजेक्ट से जुड़ता हूं, सीखने के नजरिए से ही कनेक्ट करता हूं। साबिर खान के निर्देशन में आज नाटक की प्रस्तुति राजस्थान उर्दू अकादमी के सचिव मौजम अली ने बताया कि रविवार को निर्देशक साबिर खान के नाटक 'मंटो हाजिर हो' की प्रस्तुति होगी। इस दौरान 'मौजूदा दौर में मंटो' विषय पर कानपुर की हिना आफशां की-नोट एड्रेस पेश करेंगी।

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