अवैध हिरासत का आरोपी इंस्पेक्टर ले गया डिस्क


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दो दिन पहले डीजीपी ने जिन 88 पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को डीजी डिस्क से सम्मानित किया, उनमें एक इंस्पेक्टर के दामन पर दाग पुलिस की वर्दी पहनकर गलत आचरण में लिप्त पुलिस के अधिकारी-कर्मचारियों के खिलाफ सरकार ने पिछले छह माह में सबसे अधिक एक्शन लिए,लेकिन कुछ लोग इस बीच भी पुलिस अफसरों की आंखों में धूल झोंकने में कामयाब हो जाते हैं।

ताजातरीन मामला डीजी डिस्क से सम्मानित हुए पुलिस वालों का है। इस अवार्ड समारोह में शामिल एक पुलिस इंस्पेक्टर के दामन पर अवैध हिरासत के दाग हैं। थाना इंचार्ज रहते किसी को अवैध हिरासत में रखकर ज्यादती करने के आरोप की एफआईआर उसी के थाने में दर्ज हुई। तत्कालीन पुलिस अधीक्षक का करीबी होने के कारण उसे तब तो दूसरे थाने में लगा दिया गया था, लेकिन हाल ही एसपी बदलने के बाद उसे फील्ड पोस्टिंग से हटा दिया गया। पुराने काम के बदले उसे डीजी डिस्क देने के लिए चुना गया था, बाद में उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज हो गई, फिर भी वह इस सेरेमनी में डिस्क ले गया।

पुलिस इंस्पेक्टर विक्रांत के खिलाफ 9 अक्टूबर को ही चंदवाजी थाने में आईपीसी की 10 गंभीर धाराओं समेत एससी-एसटी एक्ट में एफआईआर दर्ज हुई थी। मामले की जांच भी एससी-एसटी एक्ट होने के कारण एडिशनल एसपी स्तर के अधिकारी कर रहे हैं। मामले में आईपीसी की धारा 420,467,468,471, 384, 166,167,363, 499, 120-बी और 3 एससी-एसटी एक्ट लगाया गया है। डीजीपी डिस्क को लेकर जानकार अफसरों ने बताया कि साफ छवि और उत्कृष्ट कार्यों के लिए यह डिस्क प्रदान की जाति है। भले किसी पुलिस वाले का पुराना रिकॉर्ड अच्छा रहा हो लेकिन किसी आपराधिक मामले या आचरण संबंधि आरोप लगने पर जब तक जांच होकर क्लीन चिट नहीं मिले उसे इस तरह का अवार्ड नहीं दिया जा सकता। पुलिस महानिदेशक तो ऐसे मामले में काफी सचेत रहते हैं, आशंका है नीचे के स्तर पर जानकारी छिपाकर डिस्क दिलाई गई होगी।

थाना इंचार्ज पर गंभीर किस्म के आरोप, फील्ड से भी हटाया

मामला जयपुर ग्रामीण जिले के चंदवाजी थाना इंचार्ज रहे पुलिस इंस्पेक्टर विक्रांत शर्मा का है। उसके खिलाफ जमीन से जुड़े प्रकरण में बिल्डर को हिरासत में लेकर खाली पेपर हस्ताक्षर करवाकर परेशान करने का मामला चंदवाजी थाने में दर्ज किया गया है। हाल ही में जयपुर ग्रामीण से फील्ड पोस्टिंग से हटा दिया गया है। लोहिया कॉलोनी वैशाली नगर निवासी मुकेश महावर ने इस्तगासा के जरिए रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। उसकी कंपनी के जरिए 2007 में मैसर्स गोल्ड डेवलपर्स से लबाना गांव में 500 बीघा जमीन एक साथ खरीदकर देने का एक कॉलेबरेशन एग्रीमेंट हुआ था।

व्यापारिक मतभेद हुए तो दोनों ने एक दूसरे के खिलाफ चंदवाजी थाने में मुकदमे दर्ज करवाए। 2011 में उनके बीच एक सेटलमेंट एग्रीमेंट हुआ और दोनों ने ही केस वापस ले लिए, लेकिन गोल्ड डेवलपर्स ने 500 बीघा जमीन की एनओसी वापस नहीं दी। जबरन खाली पेपर पर हस्ताक्षर और प्रताडऩा पीडि़ता ने 2014 से 2016 तक वापस एक दूसरे के खिलाफ मुकदमे दर्ज करवा दिए। पुलिस ने दोनों मुकदमों में सिविल नेचर मानकर एफआईआर लगा दी। वर्ष 2018 में आए एसएचओ विक्रांत शर्मा पर आरोप है कि 2011 वाले एग्रीमेंट की एक फोटो कॉपी एफएसएल में भेजकर उन्होंन परिवादी पर दबाव बनाना शुरू कर दिया था।

एसएचओ ने कोर्ट से वारंट जारी करवा उसे चंदवाजी थाने ले जाकर जबरन दो खाली पेपर पर हस्ताक्षर करवाकर प्रताडि़त किया गया। पैसे के लिए दबाव बनाने का आरोप है। उसके बाद एसएचओ किसी अन्य व्यक्ति मीठा लाल को अरेस्ट करके 2011 वाले एग्रीमेंट को फर्जी करार देने के लिए चाकसू स्थित फार्म हाउस ले गए। जहां पर उससे नक्शा मौका बनवाकर हस्ताक्षर करवा लिए, जबकि फार्म हाउस ही 2014 में खरीदा गया था। ये आरोप चंदवाजी थाने में दर्ज एफआईआर में लिखे हैं।

सरकार ने कई पर लिया एक्शन

सरकार ने आईपीएस से लेकर आरपीएस, इंस्पेक्टर, सब इंस्पेक्टर सिपाही-हेडकांस्टेबल तक 100 से अधिक के खिलाफ पिछले दिनों सख्त एक्शन लिया गया है। भ्रष्ट आचरण में लिप्त होने के आरोप में आईपीएस मनीष अग्रवाल से लेकर वर्दी का दामन दागदार करने वाले आरपीएस कैलाश बोहरा, हीरालाल सैनी जैसे आरपीएस को भी सरकार ने सेवा से बर्खास्त कर दिया। इसी कड़ी में कई पुलिस इंस्पेक्टर्स के खिलाफ उन्हीं के थाने में एफआईआर दर्ज की गई। नागौर, सिरोही जिलों में दो महिला थाना इंचार्ज समेत कई अलग अलग इलाकों में पोस्टेड पुलिस इंस्पेक्टर, सब इंस्पेक्टर और हैडकांस्टेबल-कांस्टेबल को गंभीर आरोप लगने पर हटाया गया है।


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