मॉनसून के लिए तैयार है जल शक्ति अभियान

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‘जल शक्ति अभियान’ अपने विभिन्न अंगों के माध्यम से वर्तमान स्वास्थ्य संकट से उबरने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहन देने के लिए पूरी तरह तैयार है। इस साल कोविड-19 संकट और ग्रामीण क्षेत्रों में भारी श्रम बल की उपलब्धता को देखते हुए आगामी मॉनसून के मद्देनजर अभियान के तहत तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।

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इस क्रम में ग्रामीण विकास विभाग, जल संसाधन, नदी विकास, गंगा संरक्षण विभाग, भूमि संसाधन विभाग और पेयजल एवं स्वच्छता विभाग द्वारा इस साल आने वाले मॉनसून के मद्देनजर सभी राज्यों/ संघ शासित क्षेत्रों के मुख्य सचिवों को संयुक्त परामर्श जारी किया, साथ ही जल संरक्षण व पुनः संग्रहण के लिए की जाने वाली तैयारियों के बारे में अवगत कराया। हमारे देश के लिए ऐसा किया जाना सबसे ज्यादा अहम है।

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बीते साल जल शक्ति अभियान का शुभारम्भ किया गया था और इसके दायरे में जल संकट से जूझ रहे देश भर के 256 जिले शामिल थे। यह ‘अभियान’ सभी हितधारकों को जल संरक्षण अभियान के दायरे में लाने के लिए शुरू किया जनांदोलन है और बीते साल इसका देशव्यापी असर पड़ा था। राज्य सरकारों, केन्द्र सरकार, सामाजिक संगठनों, पंचायती राज संस्थानों और समुदायों सहित साढ़े छह करोड़ लोग इस अभियान से जुड़ गए हैं। 75 लाख पारंपरिक और अन्य जल स्रोत तथा तालाबों का जीर्णोद्धार किया गया और लगभग एक करोड़ जल संरक्षण एवं  वर्षा जल संचयन ढांचे तैयार किए गए।

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प्रतिक्रियाओं के आधार पर इस साल के लिए ज्यादा व्यापक और ज्यादा मजबूत रणनीति बनाई गई थी। लेकिन मौजूदा स्वास्थ्य संकट को देखते हुए केन्द्र सरकार के अधिकारियों को इन गर्मियों में इस अभियान में नहीं लगाया जाएगा। इस क्रम में सुनिश्चित किया जाएगा कि इस साल मॉनसून के दौरान वर्षा जल के संरक्षण के लिए सभी उपलब्ध संसाधनों का उपयोग किया जा सके। इसके साथ ही तैयारियों से संबंधित गतिविधियों को भी पूरा कर लिया गया है।

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गृह मंत्रालय ने सिंचाई और जल संरक्षण कार्यों को देखते हुए लॉकडाउन के दौरान प्राथमिकता के आधार पर मनरेगा कार्यों/ पेयजल तथा स्वच्छता कार्यों को कराए जाने के लिए स्वीकृति प्रदान कर दी है। केन्द्र और राज्य क्षेत्र की योजनाओं में मनरेगा कार्यों के साथ उपयुक्त सामंजस्य के साथ सिंचाई और जल संरक्षण क्षेत्रों को शामिल किए जाने के लिए स्वीकृति दे दी गई है। साथ ही सुनिश्चित किया जाएगा कि सभी कार्यों को सामाजिक दूरी के नियमों का पालन, फेस कवर/ मास्क के उपयोग और अन्य आवश्यक सावधानियों के साथ कराया जाए। पारंपरिक जल स्रोतों का जीर्णाद्धार, जल स्रोतों से अतिक्रमण हटाए जाने, झीलों और तालाबों से गाद निकालने, प्रवेश/ निर्गम मार्गों के निर्माण/ मजबूत बनाना, जल ग्रहण क्षेत्र की मरम्मत जैसे कार्य प्राथमिकता के आधार पर किए जा सकते हैं। इसी प्रकार छोटी नदियों के जीर्णोद्धार के लिए सामुदायिक नदी बेसिन प्रबंधन प्रक्रियाओं की भी शुरुआत की जा सकती है। ऐसी गतिविधियों से ग्रामीण क्षेत्रों में जल स्रोतों का स्थायित्व सुनिश्चित होगा और जल शक्ति मंत्रालय द्वारा लागू किए जा रहे जल जीवन मिशन को मजबूती मिलेगी। जल जीवन मिशन के लिए स्थानीय समुदायों द्वारा तैयार ग्राम कार्य योजना (वीएपी) इसके अलावा ग्रामीण गतिविधियों के लिए ठोस तंत्र उपलब्ध कराया जाएगा।

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