जैसलमेर - फर्जी श्रमिकों की शय पर लूट मचाता सर्किट हाऊस मैनेजर - Sangri Times

SPORTS

जैसलमेर - फर्जी श्रमिकों की शय पर लूट मचाता सर्किट हाऊस मैनेजर


अधिकारियों व नेताओं की आश्रय स्थली बनी फर्जीवाड़े की स्थली-

एक तरफ जहां पूरा देश विश्व महामारी कोरोना की जंग लड़ रहा है और प्रशासन भी अपना हरसम्भव प्रयास कर रहा है।वही स्वर्णनगरी जैसलमेर में ऐसे ही माहौल में अधिकारियों और राजनेताओं के विश्राम की एक मात्र शरणस्थली सर्किट हाउस में भारी गबन का मामला सामने आया है।जैसलमेर के एक मात्र सर्किट हाउस में प्रबन्धक द्वारा फर्जी कार्मिकों के नामों,सब्जी, मिठाई ,के नाम पर लाखों के गबन का मामला सामने आया है।
राज्य सरकार को धोखे में रखकर लाखों का चूना लगाया जा रहा है। गौरतलब है कि अक्टूबर2019 से मैनेजर पद पर कार्यरत ओ.पी. बंजारा द्वारा राज्य सरकार से वेतन के रूप में मोटी धन राशि प्राप्त करने के बावजूद प्रतिमाह कार्मिकों के नाम का 60-80 हजार रुपये का गबन किया जा रहा है। राज्य सरकार द्वारा सत्र 2019-20 टेंडर प्रणाली  के तहत  जॉब बेसिस पर सर्किट हाउस में 10 कार्मिकों का होना बताया जा रहा है व इन दस नामों पर ही ठेकेदारों की साठ-गांठ से राजकोष से धन वसूला जा रहा है।

यह है मामला -

सर्किट हाउस में वर्ष 2019-20 में जॉब बेसिस पर 10 कार्मिक स्वीकृत किये गए है,जिसमे 06 सफाईकर्मी,02 कूक, व 02 बागवान का उल्लेख है।वही वर्तमान में वास्तविक कार्यरत कार्मिक मात्र 04 ही है।जिसमें
03सफाईकर्मी व 01बागवान है।
इस प्रकार स्वीकृत 10 कार्मिकों में से कार्यरत  मात्र 4 ही है। 6 कार्मिकों  का प्रतिमाह का वेतन ठेकेदार की साठ-गांठ के चलते मैनेजर द्वारा गबन किया जा रहा  है।
इस मामले में  सूचना के अधिकार के तहत जब जानकारी मांगी गई तो आंकड़े व नाम चौकाने वाले निकले। प्राप्त सूचना  में जिन 10 नामित कार्मिकों की  सूची मिली उनके बारे में कहे तो उन दस में से एक भी कार्मिक सर्किट हाउस में  कार्यरत नहीं है। वही कई नाम तो ऐसे होंगे जिन्होंने शायद जैसलमेर को देखा भी न हो। वही जो 04 कार्मिक कार्यरत है उनका न तो किसी रजिस्टर में नाम है न कही उल्लेख।

श्रम विभाग के नियमों की उड़ी धज्जियां-

श्रम विभाग के निर्देशानुसार जॉब बेसिस पर लगे कार्मिकों को नियमानुसार  ठेकेदार द्वारा न तो खाते में सीधा वेतन भुगतान किया जा रहा है व न ही पीएफ व ईएसआई  दिया जा रहा है। वही मैनेजर द्वारा श्रमिकों को सीधा  नकद भुगतान  कर दिया जाता  है,जिससे कि वो गबन कर सके।इस प्रकार श्रम विभाग की सशर्त भुगतान नही हो रहा है।
इसी के साथ सा.प्र. वि.जयपुर द्वारा स्वीकृति होने के बावजूद भी टेंडर को नहीं बढ़ाया जा रहा है व शेष  लगे हुए  4 कार्मिकों को भी बिना पूर्व सूचना के निकाल दिया गया है।जिससे उनके परिवार का पालनपोषण करना मुश्किल हो गया है।

रक्षक ही बने भक्षक-
 
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार प्रबन्धक द्वारा सब्जी,मिठाई के बिल भी फर्जी  बनाकर  मुनाफा कमाया जा रहा वे।दुकानों से खाली बिल लाकर स्वयं द्वारा ही बिल बनाए जा रहे है और उन बिलों की कॉपी भी  दुकानदारों के पास खाली ही पड़ी रह जाती है।कुछ मुनाफे के चलते दुकानदार भी खाली बिल थमा देते है।यदि अधिकारी ही ऐसे ग़बन कर राजकोष को घाटा पहुँचाने लगे तो उन दुकानदारों को दोष भी क्या दिया जाए। सूचना के तहत  मांगी जानकारी पूर्ण न देना-
सूचना में कार्यरत श्रमिकों का नाम, पता,एकाउंट नम्बर, पीएफ,ईएसआई का ब्यूरा इत्यादि मांगा गया था जिसे मैनेजर द्वारा निर्धारित अवधि के बावजूद  यह कह कर टाल दिया गया कि कार्यालय में उपलब्ध  नही है तो कहा से दू।
उपस्थिति रजिस्टर में श्रमिकों के नाम नहीं
-गौरतलब है कि सर्किट हाउस में कई अधिकारियों और राजनेताओं का ठहराव होता है,ऐसे में वहां कार्यरत श्रमिकों की उपस्थिति का कोई रजिस्टर न होना उनकी सुरक्षा में चूक साबित हो सकता है।इसी के साथ प्रबन्धक के लिए रजिस्टर का न होना गबन में सहूलियत  का होना है।
स्थान्तरण की फिराक में मैनेजर-
सूत्रों के हवाले से है भी खबर है कि जब से तहक़ीक़ात शुरू हुई है तभी से मैनेजर द्वारा अपने आलाअधिकारियों को  ना ना प्रकार के कारण बताकर स्थान्तरण हेतु प्रार्थनाएं भेजने का दौर शुरू हो गया है।

इनका कहना है-

मैं सर्किट हाऊस में दो वर्ष से कार्यरत हूं और वर्तमान में  हम मात्र चार कर्मचारी ही कार्यरत है जिसमें दो  रूम सर्विस के लिए,एक किचन में व एक बागवान का कार्य करता है।मैंने कभी दस कर्मचारी नहीं देखे- जगदीश,बागवान।

पिछले तीन वर्ष से मैं सर्किट हाऊस में सेवाएं दे रहा हूं। वर्ष 2019-20 के टेंडर में 10 कार्मिक स्वीकृत है लेकिन लगे हुए मात्र 4 ही है।इसी के साथ लॉक डाउन के चलते  मैनेजर द्वारा बाकि गबन तो किया ही है मेरा भी अप्रेल माह का भुगतान अभी तक नहीं किया गया है। जिसके लिए मैं अतिरिक्त जिला कलेक्टर व जिला कलेक्टर को भी अपनी याचिका प्रेषित कर चुका हूं।एडीएम द्वारा मैनेजर को जबाव हेतु भी सूचना भेजी गई थी लेकिन तानाशाह मैनेजर का कोई जवाब नहीं दिया गया है।मेरे द्वारा किये गए श्रम का भुगतान न करने के कारण मैं अपने परिवार का पोषण भी नहीं कर पा रहा हूं-

शंकर चौधरी,कम्प्यूटर ऑपरेटर

Sangri Times News से जुड़े अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करे!
लेटेस्ट वीडियो के लिए हमारे YOUTUBE चैनल को विजिट करें.

loading...