खुद से करें प्यार, अपने जीवन पर हावी न होने दें मानसिक तनाव: दीपा... - Sangri Times

SPORTS

खुद से करें प्यार, अपने जीवन पर हावी न होने दें मानसिक तनाव: दीपा बरड़वाल

कहने को तो हम जमाने के साथ बदल रहे हैं लेकिन हमारी सोच आज भी वही पुरानी है जिससे आज के युवा सफर कर रहे हैं। माता-पिता बच्चों पर अपने सपने थोप देते हैं. बच्चा बनना कुछ और चाहता है लेकिन उसे मजबूर कुछ और बनने के लिए करते हैं उसका सपना डॉक्टर बनने का है पर उसे इंजीनियर बनाने को धकेल दिया जाता है। बच्चों पर अपने सपने नहीं थोप उन्हें उनकी मन की करने दे जिस विषय में उनकी रुचि हो वह उन्हें पढ़ने दे उनके साथ दुर्व्यवहार कभी नहीं करे की पड़ोसी के बच्चे के इतने नंबर आए हैं तुम्हारे क्यों नहीं आए क्योंकि सभी का दिमाग अलग अलग होता है सोचने समझने की क्षमता अलग-अलग होती है हर बच्चे के अंदर एक गॉड गिफ्ट टैलेंट छुपा होता है। तो उनके हुनर को पहचानो और आगे बढ़ने दो । मेरे कहने का मतलब ये कभी नहीं है कि आप उन्हें बिल्कुल आजादी दे दो कि किसी बात का ध्यान ही नहीं रखो या उनकी गलती को नजरअंदाज करो.... इस बात का ध्यान ही नहीं रखना कि वह क्या कर रहे हैं और क्या नहीं जी नहीं......आप अपने बच्चों के लिए वक्त निकालो उनका मूल्यांकन करो कि वह किस दिशा में चल रहे हैं अगर वह सही दिशा में चल रहे हैं तो उन्हें प्रेरित करें और यदि गलत हो तो समझा कर सही राह दिखाएं क्योंकि इस किशोरावस्था वाली उम्र में बच्चों में समझ बहुत नाजुक होती है उन्हें सही गलत का फैसला नहीं पता होता है और माता-पिता से कुछ भी कहने से डरते हैं ऐसी परिस्थितियों में कुछ बच्चे नशे की आदत लगा लेते हैं कुछ मानसिक विकार के शिकार हो जाते हैं और कुछ बच्चे तनाव में आकर आत्महत्या कर लेते है हर वर्ष पढ़ाई करने के लिए हॉस्टल में रहने वाले न जाने कितने ही बच्चे आत्महत्या कर लेते हैं। क्या खुद को मारना इतना आसान है? आत्मा को मारना इतना आसान नहीं है पहले अपने जमीर को मारना पड़ता है।

आत्महत्या के पीछे हमेशा एक कातिल छिपा होता है जो कभी दिखता नहीं है चाहे वह कोई वस्तु हो या जगह हो या कोई बुक हो या फिर कोई इंसान हो। आपने कभी जानने की कोशिश की कि आखिरकार यह बच्चे आत्महत्या क्यों करते हैं ? इसके पीछे सबसे बड़ा कारण है उनके ख्वाब अधूरे रह जाना , माता पिता का बच्चों पर दबाव जिसमें आकर वह धीरे-धीरे मानसिक तनाव से ग्रसित हो जाते हैं। मानसिक तनाव एक ऐसी बीमारी है जो दिखती नहीं है चाहे बाहर से ही वह बच्चा कितना ही खुश दिख रहा है खुश दिखना उसकी अदाकारी भी हो सकती हैं।  मानसिक तनाव कभी एकदम से नहीं होता है वह धीरे-धीरे होता है, इसलिए माता-पिता को बच्चों को वक्त देना चाहिए। बच्चा दुनिया में नया आया है उन्हें कुछ मालूम नहीं है तो उन्हें बचपन से यह बात सिखाये है कि आप हो तो सब कुछ है उन्हें झूठी शान और दिखावे से दूर रखें उन्हें बताएं कि दुनिया में ऐसी कोई चीज नहीं जिसके बिना हम नहीं रह सकते हैं। ऐसी कोई मुसीबत नहीं है जिसका कोई हल नहीं हो सकता अगर जिंदा है तो सारी मुसीबतों का हल हो सकता है उनको मुसीबतों से लड़ने का हौसला सिखाएं। बच्चों को हार की आदत भी डालें और इसका दूसरा एक महत्वपूर्ण कारण है आकर्षण जिसे वो प्यार समझ बैठते हैं। उम्र की इस किशोरावस्था में सभी को एक दूसरे से आकर्षण होता है। लेकिन आकर्षण और प्यार में अंतर होता है। आकर्षण को आप प्यार से मिलाने की भूल करते हो तो वह बहुत बड़ी गलत भी है और आज की जनरेशन है उसे लगता है कि जो मुझे पसंद आ गया वो  कैसे भी करके मुझे हासिल हो जाए। प्यार को कभी हासिल नहीं किया जा सकता है जरूरी नहीं जो आपको पसंद हो वह आपको भी पसंद करता हो।

आपको जो चीज नहीं भी मिले तो  भी उससे प्यार तो हमेशा रहेगा वह जहां भी है सुरक्षित है। अगर आप किसी से प्यार करते हो तो उसको आधार मजबूत रखो यदि आप टाइम पास के लिए किसी से आकर्षित हुए हो  इसलिए कि रोज आपको मोटरसाइकिल पर घुमाएगा बंदा फिल्म दिखाएगा ,शॉपिंग करा देगा। यदि आपका इंप्रेशन गलत है जो 90% होता है वह भावनाओं के साथ नहीं जुड़े होते हैं टाइम पास कर रहे होते हैं, वह होड़ होती है की  मेरे दोस्त के पास गर्लफ्रेंड है या एक अच्छा लवर है नहीं ये गलत है। अगर आपने नींव ही स्वार्थ के साथ रखीं है तो वहां बिल्डिंग कभी नहीं बन सकती । इसका मतलब ये नहीं कि खुद को मार दो । आपको प्यार नहीं मिला तो मरो मत, दूसरों के लिए मत जियो, खुद से प्यार करो जान है तो जहान है।

दीपा बरड़वाल
छात्रा और पत्रकार
जयपुर


 

Sangri Times News से जुड़े अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करे!
लेटेस्ट वीडियो के लिए हमारे YOUTUBE चैनल को विजिट करें.

loading...