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ऐटीसीएस इंडिया द्वारा संचालित डिजिटल मार्केटिंग सेंटर ऑफ एक्सीलेंसश् का विस्तारण करने की घोषणा

ऐटीसीएस इंडिया द्वारा एशिया-पेसिफिक क्षेत्र के विभिन्न उद्योगों की मार्केटिंग रणनीतियों को ग्राहक-अनुकूल व मार्केट ऑटोमेशन से स्मार्ट बनाया जा रहा है।


ऐटीसीएस इंडिया द्वारा संचालित डिजिटल मार्केटिंग सेंटर ऑफ एक्सीलेंसश् का विस्तारण करने की घोषणा की गई.
वर्तमान में राजस्थान की एकमात्र सीएमएमआई लेवल5 मूल्यांकित कंपनी ऐटीसीएस इंडिया ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आधुनिक मार्केटिंग ऑटोमेशन का उपयोग करते हुए श्डिजिटल मार्केटिंग सेंटर ऑफ एक्सीलेंसश् को विस्तृत कर रही है, जो एशिया-पेसिफिक क्षेत्र के विभिन्न उद्योगों की मार्केटिंग रणनीतियों को मौजूदा व संभावित ग्राहकों के सोशिअल मीडिया गतिविधियों से अनुकूलित करेगी और ग्राहकों के समक्ष उनके पसंदीदा पहलुओं के अनुसार विज्ञापन के सुझाव प्रदान करेगी।
इस सोशिअल लिसनिंग की प्रक्रिया द्वारा लोगों से प्राप्त हुई जानकारी के आधार पर गुणात्मक और मात्रात्मक विश्लेषण किया जाता है जिससे कंपनियों को अपने ग्राहकों की पसंदगी व नापसंदगी का सीधा अंदेशा प्राप्त हो सकता है. इन सभी संचित जानकारियों के आधार पर कंपनियां अपने विज्ञापन की रणनीति, जैसे प्रोडक्ट अभियान, प्रोडक्ट लॉंच और सामाजिक पहल का आयोजन कर सकती है.
“२० सालों से अधिक आई. टी. टेक्नोलॉजी व कंसल्टेंसी के अनुभव से युक्त, ऐटीसीएस इंडिया एक बहुराष्ट्रीय कंपनी है जो अपने अंतर्राष्ट्रीय ग्राहकों को डिजिटल सोल्यूशन्स, प्रोडक्ट सर्विस और कंसल्टेंसी प्रदान करती है. एशिया-पेसिफिक क्षेत्र की आर्थिक गतिशीलता का पूर्ण सदुपयोग उठाने हेतु और भारत के बढ़ते विकासात्मक अवसरों को ध्यान में रख कर, ऐटीसीएस इंडिया ं ने इस आधुनिक मार्केटिंग ऑटोमेशन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक को अमल करते हुए सोशल लिसनिंग से अपने ग्राहकों की मार्केटिंग रणनीतियों को रूपांतरित कर रही है और इसी विषय हेतु अपना श्डिजिटल मार्केटिंग सेंटर ऑफ एक्सीलेंसश् को विस्तृत कर रही है.” - ऋचा पंडित, चीफ प्रिंसिपल कंसलटेंट,ऐटीसीएस इंडियाण्
वर्तमान में मार्केटिंग योजनाओं को सोशिअल मीडिया के बढ़ते प्रभाव से सार्थक बनाना मार्केटिंग मैनेजर्स की मुख्य रणनीति बन चुकी है. ग्राहकों को व्यक्तिगत उन्मुख विज्ञापनों से आकर्षित करना व जोड़ना एक फायदेमंद अभियान का अंदेशा बन चूका है. इस सोशिअल लिसनिंग की प्रक्रिया से कंपनी-ग्राहक सम्बन्ध को एक बेहतर स्तर पर पहुंचाया जा सकता है जिसमे कस्टमर सपोर्ट, कस्टमर फीडबैक और कस्टमर चॉइस जैसे कई पहलुओं पर स्पष्टता प्राप्त की जा सकती है, जो योजनाओं से सम्बंधित जोखिम और बजट को स्पष्ट रूप से कम कर देती है.

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