COVID-19: यह हैं देश की 5 महिला कोरोना योद्धाओं की कहानियां

1. कोरोना वारीयर्स बनकर उदयपुर की महिला सरपंच भी डटी है जंग में

_x000D_ _x000D_


_x000D_ कोरोना की महामारी से पूरा देश संक्रमित हो रहा है उससे गांवों में भी खतरे की आशंका बढ़ गई हैं इस लड़ाई में गांवों के सरपंच अपनी अहम भूमिका निभा रहे हैं।  इन सब में महिला सरपंचों की भूमिका भी कम नहीं है वे स्वयं कोरोनावायरस के प्रति जागरूक है और सभी गांव वालों को जागरूक भी कर रही हैं सरपंच ओकारी बाई गमेती की देबारी पंचायत पहली ऐसी पंचायत है जहां ऑटोमेटिक सैनिटाइजेशन टनल लगाई गई हैं। इस पंचायत में आने वाले लोग सैनिटाइज होकर ही निकलते हैं दूसरी ओर गांव में लोगों को जागरूक करने के लिए एवं जरूरतमंदों को राशन सामग्री पहुंचाने के लिए  युवाओं के दल तैयार किए गए हैं।  इस प्रकार  वह कोरोना की जंग में देश की सहायता कर रही है।

_x000D_ _x000D_

2. सोनू गुर्जर बनी युवाओं के लिए उदाहरण घर में मास्क को सील कर गांव में मुफ्त बांटे

_x000D_ _x000D_


_x000D_ सोनू गुर्जर उदयपुर जिले के पंचवटी सर्किल के मावली गांव की 28 वर्षीय सोनू को एड एट एक्शन इंटरनेशनल के लाइवलीहुड एजुकेशन एंड डेवलपमेंट प्रोग्राम के तहत सिलाई परीक्षण मिला था। जब यह महामारी फैली थी तो उनके गांव  के आसपास के इलाके में  मास्क पर्याप्त नहीं थे वे सिलाई जानती थी इसके चलते उसने घर पर ही  मास्क सील कर गांव वालों को मुफ्त में मास्क बांटने के साथ-साथ इसे पहनने के लिए भी जागरूक किया।  गांव के उपसरपंच भूपेंद्र सिंह गुर्जर ने मास्क बनाने के लिए पर्याप्त कपड़ा उपलब्ध करवाया। इसके बाद सोनू की मां केसर देवी एवं भाभी पूर्णिमा ने भी मास्क बनाने में उनका सहयोग किया। सोनू ने इस पहल के जरिए युवाओं के लिए एक उदाहरण पेश किया है।

_x000D_ _x000D_


_x000D_ 3. आशिया बेगम ने ममता को किया लोकडाउन

_x000D_ _x000D_


_x000D_ देश में लोक डाउन के चलते सिपाही आशा बेगम ने अपनी ममता को भी लोकडाउन कर दिया है ताकि वह हम सभी एवं अपने घर के सदस्य को कोरोना के संक्रमण से बचा सके। यह कहानी आशा बेगम की है जो अपने दो बच्चों को घर पर छोड़ कर अपना फर्ज अदा कर रहे हैं। आशा बेगम के 6 साल का रिशु तो जैसे तैसे समझ जाता है लेकिन 1 साल की फ्रूटी नहीं समझती है। वह घर से मां के बाहर निकलने पर जोर जोर से रोने लगती है फिर भी सिपाही आसिया बेगम किसी तरह से अपने बच्चों को छोड़कर ड्यूटी पर आती है वह जानती है कि कोरोना संक्रामक बीमारी है एवं बच्चों से दूरी बनाए रखना ही उचित है। बच्चों की देखभाल तो परिवार के लोग कर लेते हैं पहले इस संकट से  निपटना एक चुनौती है। इसलिए वह अपने काम से पीछे नहीं हटती है और देश की सेवा में लगी हुई है।

_x000D_ _x000D_

4. कोरोना  की जंग में अहम हथियार देने वाली मिलन भोसले

_x000D_ _x000D_


_x000D_ मीनल भोंसले नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी  (एन आई वी)  इंडियन काउंसलिंग फॉर मेडिकल रिसर्च के अधीन काम करती हैं कोरोनावायरस के चलते भारत की आलोचना अब तक कम लोगों की जांच के लिए हो रही है  लेकिन इस स्थिति में बदलाव की उम्मीद है इस महिला वायरोलॉजिस्ट ने पुणे के बाहर उसने और उसकी टीम ने कड़ी मेहनत से इसे माइलेब डिस्कवरी में हासिल किया वह  पहली भारतीय महिला फर्म है  जिन्हें परीक्षण किट को बाजार में पहुंचाने की मंजूरी में  मंजूरी मिली इस महिला वायरोलॉजिस्ट ने अपने बच्चे को जन्म देने के महज कुछ घंटे पहले लगातार काम करके भारत का पहला वर्किंग टेस्ट  किट तैयार किया है किट को नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ वायरोलॉजिस्ट द्वारा मूल्यांकन के लिए प्रस्तुत किया था प्रस्तुत करने के बाद वह अस्पताल में भर्ती हो गई और अगले दिन मिनल ने अपनी बेटी को जन्म दिया

_x000D_ _x000D_

5. डॉ. अनुपमा  पाल

_x000D_ _x000D_


_x000D_ डॉक्टर अनुपमा पाल जो एक महिला चिकित्साधिकारी हैं  जो जालौन सी एच सी में बने कोरोना आइसोलेशन वार्ड में महिला संदिग्धों की जांच करती है। उनके बच्चे 10 साल की बेटी और 7 साल का बेटा वर्क फ्रॉम होम की बात कहते हैं क्योंकि वह कोरोना से डरे हुए हैं डॉक्टर जो आए दिन चपेट में आ रहे हैं। उनकी खबरों से व्याकुल हो उठते हैं। डॉक्टर अनुपमा बच्चों से कहती हैं कि वह घर पर काम नहीं कर सकती है अस्पताल में उनकी जरूरत है इस स्थिति में ड्यूटी के साथ थोड़ा डर भी लगता है लेकिन सतर्कता से ही आपकी जीत हो सकती हैं।  वह बच्चों को घर पर छोड़ कर अपनी ड्यूटी करती हैं और पति भी बच्चों का हौसला बढ़ाते हैं।


सांगरी टाइम्स हिंदी न्यूज़ के लिए हमारे साथ फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन और टेलीग्राम पर जुड़ें .
लेटेस्ट वीडियो के लिए हमारे YOUTUBEचैनल को विजिट करें