विश्व जनसंख्या दिवस पर महिलाओं पर COVID -19 के प्रभाव पर नीति का... - Sangri Times

SPORTS

विश्व जनसंख्या दिवस पर महिलाओं पर COVID -19 के प्रभाव पर नीति का संक्षिप्त विवरण जारी

नई दिल्ली: COVID-19 महामारी और उसके बाद के देशव्यापी लॉकडाउन ने हमारे सामाजिक और आर्थिक जीवन के सभी पहलुओं को प्रभावित किया है। परन्तु सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रतिक्रियाओं और नीतियों के द्वारा प्रभावित आबादी की विशिष्ट आवश्यकताओं को पर्याप्त रूप से संबोधित करना बाकी है। महामारी के प्रभाव से लिंग समानता और महिलाओं के यौन और प्रजनन स्वास्थ्य पर सीमित प्रगति का विपरीत दिशा में जाने का खतरा है।  

पिछले महामारियों के साथ-साथ COVID-19 के प्रभाव के साक्ष्य बताते हैं कि परिवार नियोजन सहित आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं के विघटन ने महिलाओं और लड़कियों को खतरे में डाल दिया है:

1. संसाधनों तक पहुँच कम होने से, प्रसव पूर्व और प्रसवोत्तर स्वास्थ्य देखभाल, परिवार नियोजन और गर्भनिरोधक आपूर्ति, मासिक धर्म स्वास्थ्य और अन्य प्रजनन स्वास्थ्य सेवाओं सहित कई नियमित/अनिवार्य स्वास्थ्य सेवाओं से हटा दिया जाता है।

2. शोषण और यौन हिंसा में वृद्धि

3. विघटित सामाजिक और सुरक्षात्मक तंत्र, तनाव और मानसिक चिंता में बढ़ोतरी

लंबे समय में यौन और प्रजनन स्वास्थ्य सेवाओं सहित आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं की सीमित उपलब्धता हानिकारक होगी। यूनिसेफ के अनुमानों के अनुसार, नौ महीने के अंतराल में (जब से COVID-19 को महामारी घोषित किया गया था),  भारत में सबसे अधिक 20 मिलियन जन्मों की पूर्वानुमान संख्या (forecast births) होगी । Guttmacher संस्थान ने अनुमान लगाया है कि कम-और-मध्यम-आय वाले देशों में प्रतिवर्ती (reversible) गर्भनिरोधक विधियों के उपयोग में 10% की कमी के कारण अतिरिक्त 49 मिलियन महिलाओं को आधुनिक गर्भ निरोधकों की आवश्यकता और एक वर्ष के दौरान अतिरिक्त 15 मिलियन अनचाहे गर्भधारण होंगे।

COVID -19 के विभेदक प्रभाव का आकलन करने और महिलाओं और लड़कियों को COVID-19 की प्रतिक्रिया योजना और स्वास्थ्य लाभ प्रयासों में मुख्य बने रहने की सिफारिश करने के लिए, पापुलेशन फाउंडेशन ऑफ इंडिया (पीएफआई) ने एक महत्वपूर्ण नीति पत्र “महिलाओं पर COVID 19 का प्रभाव” जारी किया।

यह महत्वपूर्ण दस्तावेज देश भर में और विशेष रूप से महिलाओं और लड़कियों पर COVID-19 संकट के विभिन्न प्रभावों को गहराई और व्यापक रूप से देखता है। लेखकों ने वैश्विक साक्ष्य के साथ-साथ पीएफआई द्वारा किए गए अध्ययनों पर भरोसा किया, जिसमें युवा लोगों, लड़कियों और महिलाओं पर COVID -19 के प्रभाव और स्वास्थ्य सेवाओं तक उनकी पहुंच का आकलन किया गया था।

 

 

पीएफआई ने राजस्थान, यूपी और बिहार के चुनिंदा जिलों में किशोरों और युवाओं के साथ टेलीफ़ोनिक सर्वे किया। राजस्थान में, किशोरों ने लॉकडाउन के दौरान प्रजनन स्वास्थ्य सेवाओं, सैनिटरी पैड और IFAs की गोलियों की आवश्यकता जरूरतानुसार पूरी नहीं होने के बारे में बताया। इसके अलावा, उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं की आवश्यकता व्यक्त की। राजस्थान में सर्वे किये गए लगभग एक-तिहाई किशोरियों ने घरेलू कामों से संबंधित कार्यभार में और घर में संघर्ष की वृद्धि को जाहिर किया।

कुछ प्रमुख सिफारिशों में शामिल हैं:

• साक्ष्यों को हमें जेंडर की दृस्टि से देखना होगा - COVI19 के आसपास कार्यक्रमों और नीतियों को संबोधित करने के लिए जेंडर के अलग-अलग डेटा और सबूतों का उपयोग करना

• 3.3 मिलियन महिला फ्रंटलाइन स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं में निवेश करें जो भारतीय सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली का चेहरा हैं और देश के कई हिस्सों में केवल मात्र स्वास्थ्य सेवा सहायक है। 

• सबसे अधिक प्रभावी सार्वजनिक स्वास्थ्य उपायों के रूप में परिवार नियोजन में निवेश को बढ़ाना।

• COVID -19 पर सूचना और जागरूकता फैलाने, एवं मिथकों और गलत धारणाओं को दूर करने के लिए सामाजिक और व्यवहार परिवर्तन संचार (SBCC) माध्यमों का उपयोग करें।

• सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत बनाने,  आपूर्ति श्रृंखलाओं को बनाए रखने, सेवा वितरण और स्वास्थ्य सुविधाओं को बनाए रखने के लिए स्वास्थ्य बजट बढ़ाने हेतु अतिरिक्त प्रयासों की आवश्यकता होती है।

पूनम मुटरेजा, कार्यकारी निदेशक, पीएफआई के अनुसार, "COVID-19 संकट ने हमारी सामाजिक सेवाओं और स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली पर अभूतपूर्व मांगें रखी हैं। महिलाओं में यौन और घरेलू हिंसा, उनकी स्वास्थ्य सेवाओं के लिए व्यवधान, गर्भ निरोधकों और मासिक धर्म स्वच्छता उत्पादों की आपूर्ति, मानसिक तनाव और चिंता का खतरा बढ़ रहा है। यह महत्वपूर्ण है कि हम योजना और कार्यक्रम निर्माण को बेहतर बनाने के लिए एक जेंडर दृस्टि के माध्यम से अपनी आपातकालीन प्रतिक्रिया नीतियों का आश्वासन देते हैं। यह महिलाओं के प्रजनन और यौन स्वास्थ्य और अधिकारों के लिए पीएफआई की मजबूत प्रतिबद्धता का भी प्रमाण है जो कि COVID-19 के लिए कार्यक्रम प्रतिबद्धता है।" 

नीति का संक्षिप्त विवरण निम्नलिखित प्रश्नों को संबोधित करता है 

• महिलाओं पर COVID-19 संकट का आर्थिक प्रभाव क्या है?

• COVID-19 प्रतिक्रिया के दौरान महिलाओं के खिलाफ हिंसा को संबोधित करने के लिए क्या किया जा सकता है?

• COVID-19 महामारी से उपजे मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों के समाधान के लिए क्या किया जा सकता है?

• परिवार नियोजन कार्यक्रमों की गुणवत्ता को कैसे बनाए रखा जा सकता है?

• COVID 19 के बाद में क्या होगा

Sangri Times News से जुड़े अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करे!
लेटेस्ट वीडियो के लिए हमारे YOUTUBE चैनल को विजिट करें.

loading...

RELATED NEWS

VIEW ALL
loading...