कविता - Sangri Times

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कविता: कुदरत का यह प्यार हैं

कविता: कुदरत का यह प्यार हैं

कुदरत का यह प्यार हैं
तुम समझो तो सही
माना मुश्किलें दो-चार हैं
तुम लड़ो तो सही...
अब जो खो जाए यह डर
तो खुद को बेहतर बनाना
किसी की ज़ोर में नहीं
खुद...

कविता: आज सामने एक बड़ी परेशानी हैं

कविता: आज सामने एक बड़ी परेशानी हैं

आज सामने एक बड़ी परेशानी हैं
कोई झूझ रहा हैं खतरें से तो किसी की आँखों में पानी हैं
किसी की सांसे चल रही हैं तो किसी की मुश्किल में जिंदगी हैं
कोई चल रहा हैं पैदल धूप और प्यास...

Poetry: एक आदमी चला दुनिया से आगे

Poetry: एक आदमी चला दुनिया से आगे

एक आदमी चला

इतना चला,

दुनिया से आगे 

निकल गया ,

पर घर नहीं 

पहुंचा

एक आदमी चला

राजा था, मंत्री थे

संत्री थ...

कविता: चांद तारों सी सजी थी उसकी डोली

कविता: चांद तारों सी सजी थी उसकी डोली

चांद तारों सी सजी थी उसकी
डोली ।
नाच गाना जोर शोर से
भागम भाग लगी थी घरवालों की
आवभगत हो रही थी मह मानो की
सुबह से कुछ गुमसुम थी वो
चहरे पे शिकंज साफ नजर...

कविता: कदम बढ़ा रूक मत यह देश तेरा है

कविता: कदम बढ़ा रूक मत यह देश तेरा है

कदम बढ़ा रूक मत यह देश तेरा है
कौन तुझे एकता के लिए अंकित करेंगे
कौन तेरा रक्त तिलक कर विजयी करेंगे
कौन तेरा मार्गदर्शन कर होंसला अफजाई करेंगे
कदम बढ़ा रूक मत यह देश ते...

कविता: कोरोना भगाओ, देश बचाओ

कविता: कोरोना भगाओ, देश बचाओ

ना जाने क्यूं आया आज ऐसा दौर ।
हर तरफ केवल कोरोना का हो रहा शोर ।।

यें घातक महामारी है ले जाएगी मौत की ओर।
करो समर्थन सरकार का, वरना छूट जाएगी जीवन की डोर।।

जनता...

कविता: रात की तन्हाइयों मे ढूंढती एक शोर हूँ

कविता: रात की तन्हाइयों मे ढूंढती एक शोर हूँ

रात की तन्हाइयों मे
ढूंढती एक शोर हूँ
कभी लगता कहीं मैं हूँ नहीं
कभी मैं ही सब ओर हूँ
मैं हु साहिल
मैं हूं मंजिल
मैं हु मेरा रास्ता
जो खो जाए खुद म...