बिल्डिंग की सही डिजाइन से बच सकती है 40 फीसदी तक बिजली


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सही डिजाइन व रंग संयोजन से ही बिजली की 40 प्रतिशत तक बिजली की बचत की जा सकती है। यह जानकारी राजस्थान अक्षय ऊर्जा निगम और ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी द्वारा जयपुर विकास प्राधिकरण में एनर्जी कंजर्वेशन बिल्डिंग कोड पर आयोजित कार्यशाला में उभर कर आई।

 अतिरिक्त मुख्य सचिव एनर्जी डॉ. सुबोध अग्रवाल ने बताया कि ऊर्जा दक्षता व ऊर्जा बचत के लिए राजस्थान अक्षय उर्जा निगम राज्य स्तरीय नोडल संस्था है। एनर्जी कंजरवेशन बिल्डिंग कोड की पालना कराने के लिए अक्षय ऊर्जा निगम और बीईई द्वारा संयुक्त रुप से जागरुकता अभियान का संचालन किया जाएगा। इसी क्रम में जयपुर विकास प्राधिकरण में कार्यशाला का आयोजन कर आवश्यक जानकारी दी गई। उन्होेंने बताया कि मुख्यमंत्री श्री गहलोत की पहल पर बिजली बचाओं अभियान व जनचेतना कार्यक्रम का ही परिणाम है कि राजस्थान उर्जा दक्षता में दूसरे स्थान पर रहा है।

 कार्यशाला को संबोधित करते हुए ऊर्जा प्रबंधक व लेखा परीक्षक श्री आर.एन. वैष्णव ने बताया कि ईसीबीसी दिशानिर्देश 2007 के अनुसार 100 किलोवाट या इससे अधिक विद्युत उपभोग करने वाली व्यावसायिक, सरकारी या गैरसरकारी भवनों के निर्माण करते समय ईसीबीसी द्वारा जारी गाईडलाईन की पालना से ऊर्जा बचत के साथ ही इस तरह के भवन पर्यावरण के अनुकूल और ग्लोबल वार्मिंग को कम करने के साथ ही बिजली के कारण होने वाले आर्थिक व्यय को भी कम करने में सहायक होते हैं। उन्होंने बताया कि व्यावसायिक,सरकारी या गैर सरकारी व रिहाइशी भवनों में केन्द्र सरकार द्वारा जारी ऊर्जा संरक्षण भवन संहिता 2007 की पालना सुनिश्चित की जानी चाहिए।

अक्षय ऊर्जा निगम द्वाराएनर्जी कंजरवेशन बिल्डिंग कोड की पालना सुनिश्चित करने के लिए इस तरह की कार्यशालाओं का समय समय पर आयोजन कर लोगों को जागरूक किया जाएगा।

एनर्जी कंजर्वेशन कोड

एनर्जी कंजर्वेशन कोड यानी ईसीबीसी केन्द्रीय उर्जा मंत्रालय तथा ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी बीईई द्वारा 2007 से लागू किया गया है। उर्जा दक्षता ब्यूरों रिपोर्ट के अनुसार भवन क्षेत्र में उत्पादित कुल बिजली की35 प्रतिशत बिजली की खपत होती है। देश में जिस तेजी से विकास हो रहा है और बिजली की खपत बढ़ रही है इसका सीधा असर ग्लोबल वार्मिंग पर पड़ रहा है। कोड के प्रावधानों के अनुसार भवन क्षेत्र को डिजाइन करने से 40 प्रतिशत तक बिजली की बचत की जा सकती है।


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