पैकेज्ड फूड के लेबल पर पोषण संबंधी जानकारी की उपयोगिता पर कार्यशाला आयोजित



राज्य में गैर संचारी रोगों की रोकथाम के लिए उत्पाद के पैकेट पर पोषण संबंधी जानकारी की उपयोगिता पर बुधवार को यहॉ जयपुर स्थित आरएएस क्लब में कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में जयपुर शहर के जाने माने चिकित्सक, न्यूट्रिशन विशेषज्ञ, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी और फूड प्रसंस्करण से जुड़े उद्योगपतियों ने भाग लिया। सभी के द्वारा इस बात की गंभीर आवश्यकता जताई गई कि साधारण और प्रभावी लेबलिंग के जरिए उपभोक्ताओं को खाद्य सामग्री के भीतर इस्तेमाल वस्तुओं की पूरी जानकारी दी जानी चाहिये। विशेषज्ञों ने कहा कि भोजन का स्वस्थ विकल्प बचपन में मोटापे को रोकने और गैर संचारी बीमारियों की रोकथाम में कारगर सिद्ध होगा। 

इस अवसर पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. नरोत्तम शर्मा ने राज्य सरकार द्वारा फूड सेफ्टी के मानकों की पालना के लिए किये जा रहे कामों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नियमित रूप से खाद्य सेंपल लिए जाते हैं। खाद्य सामग्री के पैकेट पर उत्पादन तिथि, समाप्ति तिथि नहीं होने पर कार्रवाई की जाती है। साथ ही मिलावट पाए जाने पर भारी जुर्माने का प्रावधान भी किया गया है। उन्होंने कहा कि बीमारियों से बचने के लिए जरूरी है कि डिब्बे या पैकेट पर ही साफ-साफ लिखा जाना चाहिए कि खाद्य सामग्री में क्या-क्या मिलाया गया है।

एसएमएस मेडिकल कॉलेज में कार्डियोलोजी प्रोफेसर डॉ. विजय पाठक ने कहा कि खाद्य सामग्री निर्माताओं पर यह महत्त्वपूर्ण जिम्मेदारी है कि वे खाद्य पदार्थों के पोषक तत्वों के संबंध में संवेदनशीलता से विचार करें। उन्होंने कहा कि हमारे देश में गैर संचारी रोगों में हृदय रोग सबसे सामान्य है। उन्होंने हृदय रोगों में भोजन की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि रोजमर्रा में खाए जाने वाले पैकेट बंद स्नैक्स और फास्टफूड के कारण हृदय संबंधी रोगों में कई गुना वृद्धि हुई है। इन भोज्य पदार्थों में अत्यधिक मात्रा में वसा, शर्करा और नमक होने के कारण यह हमारी सेहत को बुरी तरह प्रभावित करते हैं। 

एसएमएस मेडिकल कॉलेज में पिडियाट्रिक्स के प्रोफेसर डॉ. अशोक गुप्ता ने कहा कि देश भर में बच्चों और बड़ों में मोटापे की समस्या लगातार बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि बच्चों को शुरू से ही सही भोजन की आदत डालनी चाहिये इससे बड़े होने के बाद भी वे उसी तरह के भोजन की ओर आकर्षित होंगे। इसके अलावा बच्चों में शारीरिक गतिविधियों को भी प्रोत्साहित करना चाहिये, ताकि उन्हें मोटापे से बचाया जा सके। उन्होंने कहा कि पैकेट बंद फूड पर पोषक तत्वों की सम्पूर्ण जानकारी सरल भाषा में होना जरूरी है, जिससे लोगों को पता लग सके कि वास्तव में वे क्या खा रहे हैं। इससे एक तो उन लोगों को लाभ है, जो अपने स्वास्थ्य के प्रति सजग हैं और दूसरे वे जिन्हें किसी विशेष प्रकार के खाद्य पदार्थ से एलर्जी है।

कार्यशाला में इंडिया न्यूट्रिशन फर्स्ट के योजना समन्वयक श्री अमलीन पटनायक, कन्ट्री फोकल प्वाइंट कार्डियो वेस्कूलर डिजीज के डॉ. ओम बेड़ा ने भी गैर संचारी रोगों को रोकने के लिए फ्रंट ऑफ पैकेड लेबलिंग की उपयोगिता पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम की शुरूआत में रिटायर्ड आईएएस और गुरू भक्ति कल्याण समिति राजस्थान की अध्यक्ष डॉ. सुचि शर्मा ने कहा कि हमें पता होना चाहिये कि जो हम खा रहे हैं, वह क्या है और हमारे स्वास्थ्य के लिए कैसा है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार गैर संचारी रोगों से हर साल लगभग 4 करोड़ लोगों की मौत होती है।  कैंसर, डाइबिटीज, रक्तचाप, उच्च कॉलेस्ट्रॉल, मोटापा आदि समस्याओं के पीछे अस्वास्थ्यकर आहार एक बड़ा कारण है। उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं को स्वास्थ्यप्रद भोजन का विकल्प देना और उन्हें उत्पाद के तत्वों के बारे में जागरूक करना आज के समय की आवश्यकता है। यह उपभोक्ताओं के साथ-साथ फूड प्रोसेसिंग व्यवसाय के लिए भी लाभप्रद साबित होगा। 


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