नई श्रम संहिता पर विचार प्रक्रिया उद्योगों से जुड़े कौशल प्रशिक्षण... - Sangri Times

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नई श्रम संहिता पर विचार प्रक्रिया उद्योगों से जुड़े कौशल प्रशिक्षण संस्थान -आयुक्त श्रम विभाग

 

जयपुर। केन्द्र सरकार द्वारा प्रस्तावित नई श्रम संहिता के नये प्रावधानों पर विचार विमर्श के लिए आयुक्त, श्रम, कौशल, नियोजन एवं उद्यमिता विभाग, डॉ समित शर्मा की अध्यक्षता में राजस्थान श्रम विभाग और अन्य संबंधित विभागों के शीर्ष अधिकारियों की बैठक मंगलवार को  यहां आरएसएलडीसी सभागार में आयोजित हुई। बैठक में श्रम, उद्योग, नियोजन, कौशल आदि विभागों के अधिकारियों के अतिरिक्त उद्योग, व्यापार नियोजकों के संगठनों तथा श्रमिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया। आयुक्त श्रम डॉ शर्मा ने बताया कि नई श्रम संहिता की जरूरत गत कई दशकों से महसूस की जा रही थी। उद्यमियों, नियोजकों और श्रमिकाें के बीच अलग-अलग कानूनों को लेकर संशय की स्थिति बनी रहती थी। अब इन अलग-अलग कानूनों को एक ही व्यापक आधार वाली श्रम संहिता के दायरे में लाया गया है। इसके लागू होने से उद्योग व्यापार जगत कोे तो लाभ मिलेगा ही, श्रमिकों और कर्मचारियों को भी सुरक्षा मिलेगी। साथ ही श्रम न्यायालयों और ट्रिब्यूनलों से मुकदमाें की संख्या में भी कमी आएगी। उन्होंने बताया कि विभिन्न उद्योगों से आए प्रतिनिधियों ने कहा कि आज देश को ऎसे कुशल श्रमिकों और कार्मिकों के अत्यन्त आवश्यकता है, जो विभिन्न उद्योगों में तुरन्त कार्य कर सकें। इसके लिए जरूरी है कि हमारे औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान आईटीआई उद्योगों से जुड़े रहें। उन्होेंने भीलवाड़ा के टैक्सटाइल उद्योग का उदाहरण देते हुए बताया कि इन औद्योगिक इकाइयों मे बहुकौशल मल्टी-स्किलिंग प्रवीण श्रमिकों की बहुत मांग है, पर हमारे आईटीआई उसे पूरा नहीं कर पा रहे हैं। डॉ शर्मा ने कहा कि हमें पारम्परिक उद्योगाें और सेवा क्षेत्र के लिए जरूरी कौशल प्रशिक्षण के साथ-साथ आधुनिक युग की मांग के अनुरूप नए पाठ्यक्रम तैयार करने होंगे। सभी उद्योगों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करना जरूरी करना होगा। इस कार्य में हम सरकार के विभिन्न विभागों और उद्योेगाेंे के सीएसआर कोष से भी मदद ले सकते हैं।  बैठक में उद्योग और व्यापार क्षेत्र के शीर्ष संगठनों ‘फोर्टी’ ‘फिक्की’ और ‘सीआईआई’ तथा श्रमिक संगठनों ‘सीटू’ ‘इंटक’ बीएमएस और एटक आदि के प्रतिनिधियों ने भी विचार रखे। प्रतिनिधियों ने नई श्रम संहिता के कुछ बिन्दुओं को लेकर आपत्ति भी जताई। उन्होेंने आशा व्यक्त की कि इन आशंकाओं का नया व्यापक कानून बनाते समय निराकरण कर लिया जाएगा।

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