मिलिए वास्तुकला और कार्टून्स की दुनिया में परचम लहरा रहे निश्चल जैन से - Sangri Times

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मिलिए वास्तुकला और कार्टून्स की दुनिया में परचम लहरा रहे निश्चल जैन से

एक टैलेंट जो शब्दों से ज़्यादा चित्रों से देश दुनिया को परिभाषित करता है ,

ललित शर्मा/आयुष शर्मा

जयपुर: मनुष्य अपने प्रिय और अप्रिय भावों को अभिव्यक्ति देने के लिए विवश हो उठता है और उसकी वही कामना, कला के रूप में साकार हो उठती हे. कला के रूप में मानव स्वयं की अभिव्यक्ति करता है, कला एक ऐसी चीज़, जिसको सम्पूर्ण रूप से कभी परिभाषित नही किया जा सकता है, एक जो अकेली चीज़ कला को परिभाषित कर सकती है वो है आपकी रचना और ये भी उन्हीं में ढूंढने से मिलती है जो वाक़ई कला के प्रति अपने आप को समर्पित कर देते हैं । यूँतो  भारत ने  कई नामी  कलाकारों को जन्म दिया है। तब ज़माना अलग था आज अलग है पर जो चीज़ बिल्कुल नही बदली, वो है कलाकारों के दिमाग में चल रही रचनात्मक ख्यालातों की झांकिया। एक और चीज़ जो आमतौरपर हम सभी के द्वारा नज़रअंदाज़ करदी जाती है वो है विसुअल कम्युनिकेशन यानी सीधा बोलें तो हमें पढ़ कर जो चीजें समझमें आती हैं उसी को  एक कला के रूप में या फिर एक विसुअल के रूप में समझा जाये तो काफी आसान होता है आपने अखबारों में कई तरह के कार्टून्स देखे
होंगे जो आपको किसी हालही में हुए बड़े इवेंट या कवर स्टोरी को दर्शाते हुए मिलेंगे लेकिन उनके पीछे पनपी सोच को  लफ़्ज़ों में दर्शना  काफी मुश्किल है इसी प्रोफ़ेशन से तारलुकात रखने वाले  निश्चल जैन से आपको मिलवाते हैं जोकि पेशे से एक आर्किटेक्ट और प्रोडक्ट डिजाइनर के रूप में प्रशिक्षित है । 22 से अधिक वर्षों से वास्तुकला और डिजाइनिंग में अपना नाम कमाने वाले निश्चल जयपुर के एमएनआईटी में आर्किटेक्चर विभाग, में भी प्रोफेसर के रूप में  पढ़ाते हैं।  उनके पास एक डिजाइन स्टूडियो है जिसमें कई प्रकार के प्रकृति में विविध , कंसल्टेंसी प्रोजेक्ट हैं जिनको निश्चल अपनी पत्नी कविता जैन संग देख रेख करते हैं आपकक बतादें की कविता जैन प्रशंसित संरक्षण वास्तुकार भी हैं
निश्चल को कार्टूनिंग में शुरू से ही शौक था वह जब छोटे थे तब वे अक्सर अपने हितों को कार्टूनिंग के प्रति झुका पाया करते थे इसमें एक सबसे बड़ा रोल वॉल्ट डिज़नी से जुड़े तमाम चित्रों ने भी निभाया जिसके तहत निश्चल को अपने कार्टूनिंग करने के  जूनून इसमें  उत्साह को बढ़ाने में मदद मिली वे काफी प्रेरित हुआ करते थे । शुरुआती दौर में उन्होंने अपनी सोच से कई कार्टून बनाए और उन्हें पूरा किया धीरे धीरे उन्होंने कार्टून के रूप में अपने खुद के करैक्टर बनाने शुरू किये  समय के साथ ही वह कागज पर अपने विचार व्यक्त करने में बेहतर होते चले गए । निश्चल की मेहनत और समर्पण के परिणामस्वरूप सन.1988 में जब वे 15 साल के थे तब उनका  छत्तीसगढ़ के रायपुर के एक स्थानीय समाचार पत्र में पहला कार्टून का प्रकाशन हुआ।

निश्चल कहते हैं कि  वह कार्टूनिस्ट आर.के.  लक्ष्मण उनकी क्रिएटिव सोच और उनके सादगी भरे जीवन से काफी प्रेरित हैं । निश्चल आगे कहते हैं कि R.K लक्ष्मण के रोज़मर्रा के दृष्टांतों का उनका चित्रण दिलचस्प और  विनोदी है पर उनके चित्रों का हास्य सूक्ष्म था पर कार्टून के  विषय संवेदनशील रूप से काफी बेहतरीन थे इसको लेकर निश्चल ने R.K लक्ष्मण के काम को बारीकी से समझा कार्टून की दुनिया में वर्चस्व बनाने वाले लक्ष्मण सहाब के काम को विश्लेषण करके निश्चल ने अपने कार्टून की समझ और चित्रण को बढ़ाया है।  1990 तक, निश्चल के  500 से अधिक कार्टून विभिन्न बच्चों की पत्रिकाओं, स्थानीय और राष्ट्रीय समाचार पत्रों में प्रकाशित हुए हैं।  17 वर्ष की आयु में उन्हें ललित कला अकैडमी जयपुर द्वारा आयोजित एक प्रदर्शनी में रवींद्र मंच पर अपने काम को प्रदर्शित करने का अवसर भी मिला।
लेकिन निश्चल से  उनका कार्टून टैलेंट  अधिक समय देने की मांग कर रहा था । इसको लेकर एक जोश की लॉ तब जल पड़ी जब  कुछ साल पहले उनका एक कार्टून एक देहरादून समाचार पत्र में प्रकाशित हुआ, कार्टून उत्तराखंड में लगी भीषण आग का था जिसमें  जंगल की भड़कती हुई आग को दृश्या गया , जिसको लेकर उनके छोटे भाई के सौजन्य से और उनके तमाम करीबी दोस्तों की प्रेरणा से निश्चल ने अपनी कला पर और ज़्यादा काम किया । उन्होंने इस कला रूप को आगे बढ़ाया और विभिन्न राजनीतिक, सामाजिक मुद्दों या वर्तमान विषयों पर हर रोज कार्टून बनाने की प्रक्रिया में
लगे रहे ,  अपने व्यस्त कार्यक्रम के बावजूद, वह धार्मिक रूप से दिन में कम से कम एक कार्टून बनाने के लिए पर्याप्त समय समर्पित करते हैं।  पिछले 4 वर्षों में निश्चल ने 1000 से अधिक कार्टून बनाए हैं जिसको लेकर उन्हें बहुत सराहना मिली है।  उन्हें डीएनए (ZEE TV ग्रुप) जयपुर संस्करण में भी नियमित रूप से अपने टैलेंट को दर्शया है।
देश में लॉकडाउन के समय , उन्होंने कोरोना, महामारी, लॉकडाउन और अन्य संबंधित मुद्दों जैसे राजनीति, सामाजिक समस्याएं, डिजाइन, मास्क आदि पर अपने समय का टैलेंट संग एक बहुत प्रभावी ढंग से उपयोग किया। उनके विचार अद्वितीय हैं।  निश्चल अपने कार्टून्स सोशल मीडिया प्लेटफार्म जैसे  फेसबुक और इंस्टाग्राम पर शेयर किए हैं जिन्हें लोगों द्वारा काफी सराहा और खूब शेयर किया गया है। उन्होंने लॉकडाउन अवधि के दौरान 100 दिनों के लिए लगातार कार्टून बनाए हैं और विभिन्न घटनाओं और प्रतियोगिताओं में भी भाग लिया है। 
अपने कौशल को सीखने और सुधारने के अलावा, वे कार्यशालाओं और पाठ्यक्रमों के माध्यम से जो कुछ भी सीखा है उसे साझा करने और सिखाने की कोशिश करते रहते हैं जिसे निश्चल अक्सर विभिन्न संस्थानों, स्कूलों और विभिन्न प्लेटफार्मों पर आयोजित करते है।
आर्ट  टैलेंट के साथ साथ उन्हें ट्रेकिंग और नई जगहों को एक्स्प्लोर करना बहुत पसंद है। आपको बताते चलें कि निश्चल बतौर एक थिएटर कलाकार भी हैं और नियमित रूप से मंच पर अभिनय करते हैं और विभिन्न प्लेटफार्मों पर कई नाटक भी कर चुके हैं।

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