विदेशी सरजमीं पर राजस्थानी कला–संस्कृति का डंका बजा रहे है धोद बैंड के रहीस भारती

दिला रहे है स्थानीय कलाकारों को अलग पहचान


जयपुर. कोरोना महामारी से दुनिया परेशान है। एक ओर जहां लोगों के रोजगार जा रहे हैं तो वहीं दूसरी ओर जयपुर के रहीस भारती मिसाल पेश कर रहे हैं। वे कोरोना काल में भी सीकर, मलिकपुर, जयपुर, जोधपुर और शेखावटी जैसे क्षेत्रों के स्थानीय कलाकारों को रोजगार उपलब्ध करा रहे हैं। इन दिनों वह प्रदेश की यात्रा पर है जो राजस्थान के स्थानीय कलाकारों के लिए बेहद अहम है, क्योंकि वह अपने साथ फ्रांस से 50 कलाकारों के लिए निमंत्रण भी लाए हैं। इन स्थानीय कलाकारों के सामने फ्रांस में ढोल, तबला घूमर, लोक नृत्य, नगाड़ा और भवई की शानदार प्रस्तुति देने का मौका है। बता दें कि धोद बैंड जयपुर का है और दुनिया भर में इसकी अपनी अलग पहचान है और इस विपरीत परिस्थितियों में ऑनलाइन कॉन्सर्ट कर रहे है जिससे राजस्थान के छोटे-छोटे गांवों के कलाकारों को रोजगार मिल सके।


प्रदेश में शादी विवाह टलने से बेरोजगार हुए, अब विदेश में बजाएंगे


कोरोना काल में विवाह शादी और कार्यक्रम टल रहे हैं ऐसे में शादी-विवाह में गाने बजाने वाले देसी कलाकारों को धोद बैंड हर साल की तरह इस साल भी फ्रांस ले गया है। बैंड की इन दिनों ऑस्ट्रिया, स्वीट्जरलैंड और फ्रांस जैसे देशों में लाइव कन्सर्ट की तैयारी चल रही है और जैसे ही कोरोना से कुछ निजाद मिलती है वैसे ही अपनी प्रस्तुति देने वाले है। बैंड के कलाकार जहां पुर्तगाल के इंटरनेशनल फैस्टिम फेस्टिवल, हंगरी बुडापेस्ट के सिगेट फेस्टिवल, बेल्जियम के कुलर कैफे फेस्टिवल और कोस्टिन फोक जैसे लोकप्रिय उत्सवों में प्रस्तुति देंगे। उन्होंने यह भी बताया कि आने वाले समय में अगर कोरोना से निजाद मिलती है तो यूरोपीय देशों के भिन्न-भिन्न फेस्टिवल में कार्यक्रम करने वाले है।




दुनिया में बजाएंगे राजस्थानी संस्कृति का डंका


धोद बैंड अपने कलाकार के साथ अंतर्राष्ट्रीय मंच पर राजस्थानी संस्कृति का डंका बजाएंगे। खास बात यह है कि इसमें राजस्थान के विभिन्न छोटे गांवों और कस्बों स्थानीय कलाकार है जिन्हें धोद बैंड अलग पहचान दिला रहा है। बता दें कि राजस्थान और यहां के लोगों के प्रति रहीस भारती का यह लगाव ही है कि वे हर साल अपने प्रदेश के सैकड़ों कलाकारों को दुनिया भर में मंच और रोजगार प्रदान कर रहे हैं। खासतौर पर अब जब कोरोना से देश लड़ रहा है और लोगों के रोजगार भी जा रहे है लेकिन रहीस भारती लोगों को रोजगार दे रहे हैं तथा आर्थिक रूप से मदद कर रहे है।


रोचक हैं धोद बैंड की उपलब्धियां


धोद बैंड की शोहरत का बिगुल पूरी दुनिया में बज चुका है। रहीस भारती ने बताया कि डिज्नीलैंड में लगातार चार महीने तक प्रस्तुति देने वाला धोद बैंड भारत का पहला बैंड है। साल 2019 में मई से सितंबर महीने तक बैंड ने अपनी प्रस्तुति दी। इस दौरान 50 लाख से ज्यादा दर्शकों ने इसका लुत्फ उठाया। जबकि बैंड अपने छोटे से सफर में अब तक 700 से अधिक कलाकारों को मंच तथा एक अलग पहचान दे चुका है। ये सभी लोग राजस्थान के विभिन्न गांवों में शादी-विवाह में गाने बजाने का काम करते थे लेकिन अब इन्हें अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कुछ अलग करने का मौका मिल रहा है। बैंड यूरोप के पॉप रॉक स्टार्स के साथ म्यूजिकल मीटिंग्स भी कर चुका है। वहीं 110 से ज्यादा देशों में 2500 से अधिक म्यूजिक कंसर्ट में अपनी कला का बेहतरीन प्रदर्शन कर दुनिया भर को मंत्रमुग्ध किया।


इन हस्तियों का राजस्थानी बैंड विदेशों में कर चुका स्वागत


फ्रांस की राजधानी पेरिस में जब प्रधानमंत्री मोदी गए थे तो वहां धोद बैंड ने बेहतरीन प्रदर्शन कर उनका स्वागत किया था। इनके अलावा बैंड फ्रांस के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ द्वितीय के सामने प्रस्तुति दे चुका है। वहीं विभिन्न भारतीय दूतावासों पर भी यह बैंड राजस्थान की लोक संस्कृति का परचम फहरा चुका है। जो अपने आप में असाधारण उपलब्धि है। इस प्रकार भारती को कई देशों में सांस्कृतिक राष्ट्रदूत की उपाधि से भी नवाजा जा चुका है।


20 साल पहले धोद गांव से शुरू सफर, अब अंतर्राष्ट्रीय मंचों तक पहुंचा


देश से बाहर विदेशी सरजमीं पर अकेले नाम कमाना इतना आसान नहीं है। कड़ी लगन और मेहनत से ही यह मुकाम हासिल होता है। रहीस भारती ने इसे साबित कर दिखाया है। 20 साल पहले वर्ष 2000 में छोटे से गांव धोद से शुरू हुआ सफर आज दुनिया के विराट मंचों तक पहुंच चुका है। भारती और धोद बैंड की यह यात्रा बिना रुके अभी जारी है। हर साल लगभग आठ माह तक दुनिया भर में अंतर्राष्ट्रीय समारोहों में राजस्थान का प्रतिनिधित्व करते हैं। बाकी चार महीने अपने पैतृक गांव में कलाकारों की तलाश करते हैं। संगीत पर रहीस के खानदान की सात पीढ़ियों का वर्चस्व रहा है। रहीस भारती के नेतृत्व में लगभग 40 से 150 कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन करते हैं। हालांकि खुद भारती का शुरूआती जीवन गरीबी में बीता था लेकिन अब छोटे गांवों ढाणियों और कस्बों से आने वाले कलाकारों को अलग पहचान दे रहे हैं क्योंकि इनका बचपन ऐसी परिस्थितियों से गुजर चुका है।


फ्रांस के जाने माने लेखक मार्टिन ले कोज लिख रहे है भारती पर किताब


जानकारी के लिए आपको बता दें कि फ्रांस के जाने माने लेखक मार्टिन ले कोज भारती के जीवन पर आधारित किताब ‘राजस्थान की दिल की धड़कन रहीस भारती' लिख रहे है जो संभवतः सितम्बर महीने में प्रकाशित होगी। यह किताब 200 पेजों में फ्रांसीसी भाषा में होगी। किताब बेहद खास है क्योंकि इसमें रहीस भारती के संघर्ष और उपलब्धियों के अलावा राजस्थान की संस्कृति और स्मारकों को बेहतर जगह दी गई है। इसके अलावा इसे कई भाषाओं में अनुवादित भी किया जाएगा।


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