केंद्र सरकार के तीन बिल किसानों को बंधुआ मजदूर बनाएगा- चौधरी

किसानों के साथ धोखा, पूंजीपतियों को मिलेगा प्रोत्साहन।

जयपुर: राजस्थान के राजस्व मंत्री हरीश चौधरी ने सोमवार को विधानसभा में कृषि बिल पर चर्चा के दौरान कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा लागू किये गये तीनों कृषि बिल किसान विरोधी है और पूंजीपतियों को अवसर प्रदान कर किसानों के हितों पर कुठाराघात है। चौधरी ने कहा कि ये बिल कालाबाजारी को बढ़ावा देकर मंडियोें और किसानों को नुकसान पहुंचाएगा और किसानों को बंधुआ मजदूर बनाएगा। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद जब देश में जनता के लिए अन्न नहीं था तब हरित क्रांति के माध्यम से किसानों ने मेहनत मजदूरी कर अनाज का उत्पादन कर देश को आत्मनिर्भर बनाया जिसके लिए पूरे देश को किसानों का आभारी रहना चाहिए। उन्होंने कहा आज कोरोना काल की विषम परिस्थितियों में भी किसानों ने अन्न की कमी नहीं होने दी, ऎसे में यह बिल लाना किसानों के साथ धोखे जैसा है। उन्होंने कहा कि हमारे देश के किसानों के लिए धरती उनकी मां के समान होती है जिसकी कोख को वे अपने खून पसीने से सींच कर हमारा पेट भरते हैं और हमें भूखा नहीं सोने देते है। उन्होंने कहा कि कभी भी किसानों अथवा किसान संगठनों ने ऎसे बिल की मांग नहीं की। उन्होंने कहा कि यह अमरीका के वालमार्ट की तर्ज पर पूंजीपतियों को अवसर प्रदान करने वाला बिल है। चौधरी ने उदाहरण देते हुए कहा कि (एमडीएच) मसालों की बड़ी कम्पनी का खरीद सेन्टर नागौर में स्थित है, जहां किसान सीधे बिना किसी प्रतिबन्ध के अपनी फसल बेच सकते हैं।
चौधरी ने बताया कि बिहार के किसानों की स्थिति देखे जहां वर्ष 2006 में एग्रीकल्चर प्रोड्यूस मार्केट कमेटी (ए पी एम सी) व्यवस्था खत्म कर दी गई, आज वहां के किसान भी पंजाब की मंडी जैसी व्यवस्था कि मांग कर रहे है। उन्होंने कहा कि पूरे देश में इस बिल का किसान और किसान संगठन विरोध कर रहें है। भूमि अधिग्रहण बिल में संशोधन कर किसान से छीन कर कॉरपोरेट को लाभ पहुंचानें का प्रयास साफ दिखाई दे रहा है परन्तु देश का किसान इस बिल की सच्चाई समझ रहा है और अंत में किसान ही जीतेगा। राजस्व मंत्री ने कहा कि राजस्थान सरकार जो बिल लेकर आई है उसका मकसद किसानों को लाभ पहुंचाना है। राज्य सरकार के फैसले के चलते पांच एकड़ के अंदर की भूमि की कोई कुर्की नहीं कर सकता है वहीं केंद्र सरकार ने सेस लगाकर किसानों को कमजोर करने का काम किया है। उन्होंने कहा कि साधारण किसान अपने हित के लिए उच्च न्यायालय एवं उच्चतम न्यायालय में जाकर लड़ नहीं सकता। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार जिन कृषि मंडियों को इस बिल के माध्यम से समाप्त करना चाह रही है, वह मंडी सरकार की नहीं किसानों की है। वर्तमान में मंडी व्यवस्था में किसान एवं आड़तियों में हुए किसी भी प्रकार के विवाद का 100 प्रतिशत निपटारा मंडी समिति के माध्यम से त्वरित कर दिया जाता है, उन्हें इसके लिए न्यायालय तक जाने की कोई आवश्यकता नहीं पड़ती। राजस्व मंत्री हरीश चौधरी ने कहा कि कृषि विशेषज्ञ देवेंद्र शर्मा के अनुसार केंद्र सरकार ने जिस ओपन फार्मिंग वाले अमेरिकी मॉडल को भारत में इन कृषि बिलों के माध्यम से थोपने का काम किया है उस अमेरिका में 31.68  लाख करोड रुपए किसानों पर बैंकों का बकाया है एवं वहां का सारा सिस्टम सरकार की सब्सिडी पर चलता है अमेरिका में 44 लाख रुपए प्रति वर्ष प्रति किसान को सब्सिडी मिलती है जबकि भारत में यह मात्र ₹15000 ही है।

सांगरी टाइम्स हिंदी न्यूज़ के लिए हमारे साथ फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन और टेलीग्राम पर जुड़ें .
लेटेस्ट वीडियो के लिए हमारे YOUTUBEचैनल को विजिट करें