मछली पालन के लिए कौशल विकास की आवश्यकता - डॉ. शर्मा



उदयपुर, 02 दिसम्बर, 2021 महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, उदयपुर के संगठक मात्स्यकी महाविद्यालय में गुरूवार 02 दिसम्बर, 2021 को मीठे पानी की पालने योग्य मछलियाँ एवं पालन पद्धति पर राष्ट्रीय मात्स्यकी विकास बोर्ड, मत्स्य विभाग, हैदराबाद मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा प्रायोजित 8 प्रशिक्षण कार्यक्रमों की श्रृंखला के दूसरे 3 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रारम्भ हुआ।


कार्यक्रम के समन्वयक डॉ. बी. के. शर्मा ने राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड की योजनाएं एवं प्रशिक्षण की उपयोगिता पर प्रशिक्षणार्थियों को विस्तृत जानकारी प्रदान की। डॉ. शर्मा ने मत्स्य प्रशिक्षण कार्यक्रम की एन.एफ.डी.बी. द्वारा स्वीकृति में मत्स्य विभाग, राजस्थान सरकार की अहम भूमिका पर आभार व्यक्त किया।


प्रशिक्षण के उद्घाटन अवसर पर डॉ. शर्मा ने प्रशिक्षणार्थियों को अपने नियमित कृषि कार्यों के अलावा मछली पालन व्यवसाय को अपनाने की सलाह दी साथ ही इस व्यवसाय से होने वाली आमदनी एवं अपने जीवन स्तर को सुधार कर समाज के लिए एक उदाहरण प्रस्तुत करने का संदेश दिया जिससे जनजाति क्षेत्र के किसान अपना जीवनस्तर सुधार सकें। डॉ. बी.के. शर्मा ने कार्यक्रम के दौरान प्राप्त जानकारी को जन-जन तक पहुचाने व मत्स्य पालन को अपनाने का आह्वान किया।

 

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. एस. के. शर्मा, निदेशक अनुसंधान ने कहा कि प्रशिक्षणार्थियों के लिए मत्स्य पालन की नई-नई विद्याओं को अपना कर स्वयं का व्यवसाय शुरू कर सकते हैं और व्यवसाय में आगे बढ़ने के लिए हमेशा 1 प्रतिशत की वृद्धि की सोच को साथ लेकर चलना चाहिए जिससे भविष्य में दूसरे लोगों को भी रोजगार प्रदान कर सकते हैं।


डॉ. शर्मा ने प्रशिक्षणार्थियों से मत्स्य पालन कौशल के विभिन्न आयामों पर प्रकाश डालते हुए आह्वान किया कि दक्षिणी राजस्थाना में बड़ी संख्या में जल संसाधन उपलब्ध है। जिनमें आप थोड़ी सी पूंजी एंव समय लगाकर अत्यधिक लाभ कमा सकते हैं और अपना जीवनस्तर उंचा उठा सकते हैं।

 

कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि एवं मात्स्यकी महाविद्यालय के पूर्व अधिष्ठाता डॉ. सुबोध शर्मा ने प्रशिक्षणार्थियों को मत्स्य पालन के क्षेत्र में बढ़ते हुए योगदान व भारत सरकार द्वारा शुरू की गई प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना एवं अलग से स्थापित किए गए मंत्रालय की जानकारी, प्रशिक्षणार्थियों को प्रदान की। प्रशिक्षण कार्यक्रम का संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन महाविद्यालय के सहायक प्राध्यापक डॉ. एम.एल. ओझा ने दिया।

 

सभी प्रतिभागी किसानों ने प्रशिक्षण में बढ़-चढ़कर भाग लिया। महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. बी. के. शर्मा ने प्रशिक्षणार्थियों को मत्स्य बीज पालन हेतु नर्सरी, संवर्धन व संग्रहण तालाबों की विस्तृत जानकारी एवं मत्स्य पालन तालाबों में पाई जाने वाली जलीय खरपतवार एवं परभक्षी मछलियों और जलीय कीटों के नियंत्रण की चलचित्रों के माध्यम से विस्तृत जानकारी प्रदान की।



सांगरी टाइम्स हिंदी न्यूज़ के लिए हमारे साथ फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन और टेलीग्राम पर जुड़ें .
लेटेस्ट वीडियो के लिए हमारे YOUTUBEचैनल को विजिट करें