अनुभवों का लाभ उठाएं और अपने सपनों को उड़ान दें : डॉ.नरेंद्र सिंह राठौड़

ये आह्वाहन डॉ.नरेंद्र सिंह  राठौड़ , माननीय कुलपति , महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय , ने  उदयपुर सामुदायिक एवं व्यावहारिक विज्ञान महाविद्यालय दवरा आयोजित तथा अखिल भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद्,नई दिल्ली,राष्ट्रीय कृषि उच्च शिक्षा परियोजना द्वारा प्रायोजित “ग्यारह दिवसीय  प्रेरक श्रृंखला जिसमें सफल महिला उद्यमियों के साथ स्नातक छात्रों की सहभागिता की  सुविधा  प्रदान करने  हेतु आयोजित  ग्यारह दिवसीय  "फ़र्श से अर्श तक " विषयक एलुमिनाई  इंटरफ़ेस राष्ट्र स्तरीय कार्यक्रम” के तीसरे दिन के सत्रों के दौरान सभी प्रतिभागियों से किया। आपने कहा की इस अनूठे कार्यक्रम में सफल उद्यामियों के अनुभवों को सुनना और लाभ लेना ठीक वैसा ही है जैसे बहती गंगा में हाथ धोना। ऐसा मौका जीवन में बार बार नहीं मिलता ,इसका पूरा लाभ उठाएं।
प्रारम्भ में अधिष्ठाता ,सामुदायिक एवम व्यवहारिक विज्ञान महाविद्यालय ,डॉ. मीनू श्रीवास्तव ने प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए दो दिन में संपन्न सत्रों के दोहरान बिंदुओं पर प्रकाश डालते हुए प्रस्तुतकर्ताओं की सराहना की और कहा की प्रत्येक के जीवन संघर्ष भिन्न भिन्न होते हैं ,उनसे मिलने वाली सीख को आत्मसात कर भविष्य में काम लेने से प्रतिभागियों को  निःसंदेह फायदा होगा। आपने विश्वास जताया की वर्तमान छात्र यथासंभव सक्रियता के साथ अपनी भागीदारी सुनिश्चित करेंगे। साथ ही प्रथम सत्र की मुख्य वक्ता डॉ. जया एच।. मणी  ,एग्जीक्यूटिव  डायरेक्टर  , ‎दीक्षा  प्लेस्कूल  एवम  चाइल्ड  केयर  सेंटर ,मुंबई  का परिचय देते हुए आपने उनके खाद्य एवम पोषण विशेषज्ञ होने के बावजूद विषय क्षेत्र से इतर,ये मुकाम हासिल करने पर हर्ष व्यक्त किया।
डॉ। जया ने अपने उद्यम अनुभव में प्रारम्भ  से लेकर आज तक के सफर में आयी कठिनाइयों ,चुनौतियों के विषय में विस्तार से बताते हुए उनसे पार पाने में निष्ठां ,मनोबल ,निरंतर प्रयास ,ज्ञान की गहराई ,बड़ों का आशीर्वाद और गुरुजनों के सहयोग की महत्ता बताई .उन्होंने बताया की यदि आप छोटे बालकों के साथ काम करते हो तो ये ज़रूरी है की हर बच्चे में आपको अपने बच्चे का अक्स नज़र आये ,उसके साथ भावात्मक जुड़ाव हो तभी आप निःस्वार्थ भाव से अपने कार्य के साथ न्याय कर पाओगे। उनके परिवारजनों को भी यथयोग्य सम्मान देना चाहिए जिससे आप पर उनका विस्वास गहरा होगा और आपके उद्यम की नीव मज़बूत होगी। आपने स्नेह ,शिक्षा और संस्कारों को सफलता की धुरी बताया। नर्सरी के साथ साथ आपके द्वारा चलाये जा रहे शिशु गृह और पाठ्यक्रम को मिली पहचान के श्रेय आपने नवीनतम जानकारी के प्रति जागरूकता  को दिया।              
द्धितीय सत्र की मुख्य वक्ता श्रीमती बोलिया ,संचालिका ,प्लांट किंगडम गार्डेन सेंटर ,उदयपुर ने बताया की 1989 में बी. एस. सी. करने के बाद आपने ऍम।. कॉम.  किया। फिर जर्नलिस्म में डिप्लोमा करने के बाद कंप्यूटर का बेसिक कोर्स भी किया। जो उस समय काफी मायने रखता था। शिक्षा के  बहुआयामी रुझान के बारे में पूछने पर आपने बताया की 11 वीं  पास करते ही उनका विवाह हो गया। छोटी सी उम्र  के विवाह , उसके परिणाम और चुनौतियों पर बात करते हुए उन्होंने बताया की उनका सफर अत्यंत ही कष्टप्रद रहा किन्तु जीवनसाथी के सतत सहयोग से उन्होंने ये मुकाम हासिल किया। पति के पेड पौधों के प्रति जूनून ने वर्तमान की तकरीबन 400 प्रजातियों वाले पौधों और अनेकों फलों की इस नर्सरी के वर्तमान स्वरुप के स्वप्न को साकार किया। आज आपने 7 लोगों को रोज़गार दे रखा है जिसमें 4 स्थाई और 3 अस्थाई कर्मचारी है। उद्यम में सफलता के लिए धैर्य ,परिश्रम ,हौसलों और प्रकृतिप्रेम को अनिवार्य मानने के साथ ही आपने बताया की पेड पौधोके साथ बच्चों के सामान व्यवहार और बातें करनी चाहियें। ये सजीव हैं और इसका प्रतिफल ज़रूर देते हैं।
सम्पन टिप्पणी करते हुए आयोजन सचिव ,डॉ. गायत्री तिवारी ने कहा ने कहा की आज के दोनों वक्ताओं का नर्सरी से सम्बंधित होना इत्तफ़ाक़ रहा हो किन्तु दोनों की कार्यप्राणाली सामान ह। दोनों ने अपनी सफलता का श्रेय अपने परिवार और गुरुजनों को दिया जो की नई पीढ़ी को कृतज्ञता का भान कराएगा। प्रतिभागियों की बढ़ती हुई संख्या पर हर्ष व्यक्त करते हुए उन्होंने ने प्रश्नोत्तरी में अधिकाधिक शिरकत करनी की बात कही। तकनीकी सहयोग के लिए डॉ. स्नेहा जैन,सुश्री विशाखा त्यागी और श्रीमती रेखा राठौर एवम सभी को धन्यवाद ज्ञापन के साथ सत्र समाप्त हुए।

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