एब्डोमिनल कैंसर डे : विशेषज्ञों ने भारतीय जरूरतों के अनुरूप स्क्रीनिंग प्रोटोकॉल की आवश्यकता बताई

एब्डोमिनल कैंसर के प्रति जागरूकता की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए डॉ. संदीप जैन ने कहा, “गैस्ट्रो इंटेस्टाइनल कैंसर के मामलों में ‘पेशेंट इंटरवल’ काफी अधिक होता है, यानी मरीज द्वारा लक्षण महसूस करने और डॉक्टर से परामर्श लेने के बीच लंबा अंतराल रहता है।

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ST Correspondent Verified Media or Organization • 16 Apr, 2026 Team
May 21, 2026 • 5:43 PM | जयपुर  0
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एब्डोमिनल कैंसर डे : विशेषज्ञों ने भारतीय जरूरतों के अनुरूप स्क्रीनिंग प्रोटोकॉल की आवश्यकता बताई
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एब्डोमिनल कैंसर डे : विशेषज्ञों ने भारतीय जरूरतों के अनुरूप स्क्रीनिंग प्रोटोकॉल की आवश्यकता बताई
एब्डोमिनल कैंसर डे : विशेषज्ञों ने भारतीय जरूरतों के अनुरूप स्क्रीनिंग प्रोटोकॉल की आवश्यकता बताई

जयपुर: एब्डोमिनल कैंसर डे के अवसर पर विशेषज्ञों ने भारतीय आबादी के अनुरूप कैंसर स्क्रीनिंग प्रोटोकॉल विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। मंगलवार को जयपुर में आयोजित प्रिवेंटिव जीआई ऑन्कोलॉजी के वैज्ञानिक कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने कहा कि भारत में लगभग 70 प्रतिशत एब्डोमिनल कैंसर के मामले एडवांस स्टेज में सामने आते हैं, जबकि समय पर स्क्रीनिंग के माध्यम से इनकी शुरुआती पहचान कर मरीजों की जान बचाई जा सकती है। यह वैज्ञानिक कार्यक्रम एब्डोमिनल कैंसर डे के अवसर पर आयोजित किया गया।

एब्डोमिनल कैंसर के प्रति जागरूकता की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए डॉ. संदीप जैन ने कहा, “गैस्ट्रो इंटेस्टाइनल कैंसर के मामलों में ‘पेशेंट इंटरवल’ काफी अधिक होता है, यानी मरीज द्वारा लक्षण महसूस करने और डॉक्टर से परामर्श लेने के बीच लंबा अंतराल रहता है। यह देरी मरीज के लिए जोखिम बढ़ा देती है, इसलिए इस विषय में जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है।”

फोर्टिस हॉस्पिटल के डायरेक्टर एवं हेड, गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी डॉ. एस.एस. शर्मा ने कहा, “जहां शुरुआती पहचान होने पर कैंसर मरीजों की सर्वाइवल रेट 85-90 प्रतिशत तक होती है, वहीं देर से पहचान होने पर यह घटकर केवल 10-15 प्रतिशत रह जाती है। आंकड़े बताते हैं कि स्क्रीनिंग और गुणवत्ता जांच का शुरुआती पहचान में सकारात्मक प्रभाव पड़ता है, इसलिए जागरूकता बढ़ाना बेहद जरूरी है।”

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