चुनाव के समय खंडित न हो भाईचारे का भाव

Radhika Joshi
Radhika Joshi Verified Local Voice • 01 May, 2026 Author
October 13, 2022 • 4:52 PM  1
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चुनाव के समय खंडित न हो भाईचारे का भाव
“चुनाव के समय खंडित न हो भाईचारे का भाव”
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13 Oct 2022
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चुनाव के समय खंडित न हो भाईचारे का भाव
चुनाव के समय खंडित न हो भाईचारे का भाव

चुनाव में कुछ लोगों द्वारा इसे आपसी साख का प्रश्न बना लिया जाता है जो धीरे-धीरे जहर का रूप ले लेता है। बढ़ती प्रतिद्धंद्विता रिश्तों का क़त्ल करने लगती है। अगर कोई ऐसे समय साथ न दे तो मित्र भी दुश्मन लगने लग जाते है। मगर यह हमारी भूल है। कोई भी चुनाव आखरी नहीं होता है। और रिश्तों से बढ़कर तो कतई नहीं। हम पद पाने की होड़ में ये भूल जाते है कि हमसे पहले भी चुनाव हुए है और आगे भी होंगे। इसलिए कुछ वोटों के लिए परिवार के लोगों, मित्रों, सगे-सम्बन्धियों, पड़ोसियों और अन्य से दुश्मनी के भाव से पेश आना सही नहीं है। क्योंकि चुनाव की रात ढलते ही हमें अपने आगे के दिन इन्ही लोगों के साथ व्यतीत करने है।

-प्रियंका सौरभ

'एकता' और 'भाईचारा' किसी प्रगतिशील समाज की मूलभूत ज़रूरत है। लेकिन सामाज विभिन्न जातियों और समुदायों में बंटा हुआ है, कई बार ये वजहें कड़ुवाहट पैदा करती हैं। ऐसी स्थितियों में ही सजग रहने की ज़रूरत होती है। शायरों ने 'एकता' और 'भाईचारा' जैसे बुनियादी इंसानी जज़्बातों को ख़ूबसूरत अल्फ़ाज़ों से नवाजा है। हमारे देश में चुनाव जहाँ लोकतंत्र के लिए पर्व का रूप लेकर आते है वही ये हमारे समाज में आपसी भाईचारे और एकता को खत्म करने में किसी यम से कम नहीं है। सत्ता का नशा ऐसे समय चरम पर होता है जो हमारे आपसी प्यार को निगल जाता है और दीखते है तो सिर्फ वोट।

कई प्रत्याशी (सभी नहीं)  इन दिनों चुनावी लाभ के लिए मुद्दे उठाते हैं और एक-दूसरे पर आरोप लगाते हैं, जिसका कारण है कि पक्ष और विपक्ष के बीच रिश्तों में कमी आ गई है। सभी लोग एक-दूसरे पर बयानों के जरिए आक्रामक प्रहार करते रहते हैं और आपस में उलझते रहते हैं, जिसके कारण समस्याओं का तार्किक रिश्ता ही जैसे रुक गया है। सुधार के पक्ष में जो काम होने चाहिए वो नहीं हो पा रहे हैं। विकास की दिशा में भी ठोस कदम उठाना और ऐसी कई सारी चर्चाएं उठने ही नहीं पाती है और बात वहीं की वहीं धरी रह जाती है। चुनाव धार्मिक युद्ध बन जाते हैं, हिन्दू-मुस्लिम और जाति -पाति में फूट डाल देते हैं, प्रत्याशी नेता। चुनाव तो खत्म हो जाते हैं लेकिन वह फूट आजीवन चलती रहती है।

Radhika Joshi Verified Local Voice • 01 May, 2026 Author

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