स्कूलों को 21वीं सदी के अनुरूप तैयार करने के उद्देश्य से बियॉन्ड स्कूल ने लखनऊ में ऑफलाइन अपस्किलिंग एकेडमिक प्रोग्राम्स की शुरुआत की 

बियॉन्ड स्कूल महज़ दो वर्षों में, समूचे भारत में 10,000 से अधिक छात्रों और 20 से अधिक इंटरनेशनल मार्केट्स में कौशल-आधारित पाठ्यक्रम वितरित कर चुका है 

Pooja Padiyar
Pooja Padiyar Author
November 25, 2022 • 8:21 PM  0
शिक्षा
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स्कूलों को 21वीं सदी के अनुरूप तैयार करने के उद्देश्य से बियॉन्ड स्कूल ने लखनऊ में ऑफलाइन अपस्किलिंग एकेडमिक प्रोग्राम्स की शुरुआत की 
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25 Nov 2022
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स्कूलों को 21वीं सदी के अनुरूप तैयार करने के उद्देश्य से बियॉन्ड स्कूल ने लखनऊ में ऑफलाइन अपस्किलिंग एकेडमिक प्रोग्राम्स की शुरुआत की 
स्कूलों को 21वीं सदी के अनुरूप तैयार करने के उद्देश्य से बियॉन्ड स्कूल ने लखनऊ में ऑफलाइन अपस्किलिंग एकेडमिक प्रोग्राम्स की शुरुआत की 

लखनऊ: अपनी तरह की अनूठी इन-स्कूल स्किल लैब्स से परिपूर्ण अपस्किलिंग एजुकेशन कंपनी बियॉन्ड स्कूल उत्तर प्रदेश स्थित लखनऊ में स्कूलों में अपने विशेष पाठ्यक्रम की शुरुआत करने के लिए तैयार है। इस पहल के तहत किए जा रहे कंपनी के पहले चरण का लक्ष्य लखनऊ के 12 स्कूलों में 6,000 छात्रों का नामांकन करना है।
वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार, उत्तर प्रदेश में 67.68% साक्षरता दर है और साथ ही 9,000 से अधिक स्कूल ऐसे हैं, जिनमें शिक्षा के सभी स्तर शामिल हैं।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 [नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (एनईपी)] के तहत देश को कौशल विकास के लिए प्रोत्साहित करने के तहत इस अपस्किलिंग प्लेटफॉर्म का उद्देश्य ट्रेडिशनल स्कूली शिक्षा की कमियों को दूर करते हुए, और प्रत्येक बच्चे के भविष्य की सफलता को ध्यान में रखते हुए जरुरी स्किल्स प्रदान करना है। कम्युनिकेशन लैब्स, डिज़ाइन थिंकिंग लैब्स, फाइनेंशियल लिटरेसी लैब्स और लॉजीमैथ लैब्स वाली अपनी स्किल लैब्स के जरिए, बियॉन्ड स्कूल ग्रेड 1 से 8 तक के छात्रों को कम्युनिकेशन, लॉजिकल और क्रिटिकल थिंकिंग, फाइनेंशियल लिटरेसी और डिज़ाइन थिंकिंग जैसी जरुरी स्किल्स के साथ सशक्त बनाने के लिए इन-स्कूल एकेडमिक प्रोग्राम्स की शुरुआत करेगा।

अपने विस्तार पर बोलते हुए और ब्रांड को डिजिटल से परे ले जाने पर, पायल गाबा, सीईओ और फाउंडर, बियॉन्ड स्कूल, ने कहा, "बदलती दुनिया के साथ ही भविष्य की नौकरियों की जरूरतें भी बदल गई हैं। अपने कम्युनिकेशन और फाइनेंशियल लिटरेसी लैब्स के लिए स्कूलों से मिली जबरदस्त प्रतिक्रिया हमारे लिए बहुत मायने रखती है। हमारी प्रारंभिक मीटिंग्स के दौरान, स्कूल के प्रिंसिपल्स ने हमें बताया कि बच्चे अंग्रेजी बोलने और लिखने में तो सहज होते हैं, लेकिन जब बात आत्मविश्वास से अंग्रेजी भाषा बोलने की आती है, तो उन्हें अतिरिक्त मेहनत की जरुरत होती है। हमारी कम्युनिकेशन्स लैब में इस पर काम किया जाता है। एक अन्य मुद्दा जो उठाया गया था, वह था बच्चों में बेसिक फाइनेंशियल लिटरेसी की कमी और आज के बदलते समय में इसका महत्व।"

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