मेवाड़ की धरती से समाज को नई क्रांति का धावक नीरज प्रजापत
मेवाड़ (राजस्थान) [भारत], 7 जुलाई : मेवाड़, राजस्थान का वह क्षेत्र जहां आदिवासी समुदाय की समृद्ध संस्कृति और परंपराएं आज भी जीवित हैं। लेकिन इनके …
मेवाड़ (राजस्थान) [भारत], 7 जुलाई : मेवाड़, राजस्थान का वह क्षेत्र जहां आदिवासी समुदाय की समृद्ध संस्कृति और परंपराएं आज भी जीवित हैं। लेकिन इनके जीवन में एक दुखद मोड़ तब आता है जब इन्हें अनपढ़, पिछड़ा, या अयोग्य कहकर हाशिए पर धकेल दिया जाता है।
यह कहानी है शंभू की — एक ऐसे व्यक्ति की जो अपने आदिवासी समाज का हिस्सा है, लेकिन समाज की मुख्यधारा में उपेक्षा और अपमान के कारण अपना असली नाम और अस्तित्व तक भूल चुका है। स्कूल में उसे आलोचना और तिरस्कार का सामना करना पड़ा। उसकी कला, संगीत और नृत्य की प्रतिभा को उसकी आदिवासी छाप के कारण नजरअंदाज कर दिया गया। निराशा और उपेक्षा ने उसे स्कूल छोड़ने पर मजबूर कर दिया। जंगल में लकड़ी बीनने और गोंद इकट्ठा करने जैसे कामों में भी उसे शोषण का सामना करना पड़ा। सैकड़ों पेड़ लगाने और उनकी रक्षा करने के बावजूद उसे न सम्मान मिला, न पहचान। लोग उसे बस “कालू” कहकर पुकारते थे।
शंभू की इस मार्मिक कहानी ने नीरज कुमार को झकझोर दिया। उन्होंने समाज को बदलने का संकल्प लिया और सदाशिव मेडिटेशन रिसर्च फाउंडेशन की स्थापना की। इस पहल का उद्देश्य था — शिक्षा, लोककला और किफायती प्रशिक्षण के माध्यम से आदिवासी समुदाय को सशक्त बनाना।