कारीगरों की आजीविका को सशक्त बनाने के लिए हैंडलूम को रोज़मर्रा के फैशन से जोड़ रहा ‘इंडियन पीकॉक’

हैदराबाद, तेलंगाना, भारत पीढ़ियों से इस कला में माहिर भारतीय हैंडलूम (हथकरघा) बुनकरों को उन्हीं की अपनी कहानी से बाहरRead Now ►

NewsVoir
NewsVoir Verified Media or Organization • 16 Apr, 2026 Agency
April 27, 2026 • 1:47 PM  0
बिज़नेस
NEWS CARD
Logo
कारीगरों की आजीविका को सशक्त बनाने के लिए हैंडलूम को रोज़मर्रा के फैशन से जोड़ रहा ‘इंडियन पीकॉक’
“कारीगरों की आजीविका को सशक्त बनाने के लिए हैंडलूम को रोज़मर्रा के फैशन से जोड़ रहा ‘इंडियन पीकॉक’”
Favicon
Read more on sangritimes.com
27 Apr 2026
https://www.sangritimes.com/business/indian-peacock-connecting-handlooms-with-everyday-fashion-to-empower-the-livelihoods-of-artisans
Copied
कारीगरों की आजीविका को सशक्त बनाने के लिए हैंडलूम को रोज़मर्रा के फैशन से जोड़ रहा ‘इंडियन पीकॉक’
कारीगरों की आजीविका को सशक्त बनाने के लिए हैंडलूम को रोज़मर्रा के फैशन से जोड़ रहा ‘इंडियन पीकॉक’

हैदराबाद, तेलंगाना, भारत : पीढ़ियों से इस कला में माहिर भारतीय हैंडलूम (हथकरघा) बुनकरों को उन्हीं की अपनी कहानी से बाहर किया जा रहा था। उनके द्वारा बनाए गए कपड़े या तो संग्रहालयों तक सीमित रह गए या उन पर केवल “एथनिक वियर” (ethnic wear) का ठप्पा लगा दिया गया। इस बीच उनकी आजीविका अनिश्चित होती गई और उनका ज्ञान धीरे-धीरे विलुप्त होने की कगार पर पहुंच गया।

इंडियन पीकॉक’ के हर परिधान के पीछे हैं इन कारीगरों के हाथ

ऐसा इसलिए नहीं है कि इस शिल्प (craft) का कोई मूल्य नहीं बचा, बल्कि इसलिए है क्योंकि करघे (loom) से लेकर रोज़मर्रा के जीवन तक के सफर में बहुत सी बाधाएं हैं।

‘इंडियन पीकॉक’ सीधी साझेदारी के माध्यम से इन दूरियों को मिटाने का प्रयास कर रहा है।

bolt यह भी जरूर पढ़ें

rss_feed Disclaimer
Story published through syndicated feed.
favorite Follow us for the latest updates:

NewsVoir Verified Media or Organization • 16 Apr, 2026 Agency

Agency

home Home amp_stories Web Stories local_fire_department Trending play_circle Videos mark_email_unread Newsletter