पारुल यूनिवर्सिटी ने की अपने इंटरनेशनल फोकलोर फेस्टिवल के तीसरे संस्करण की सफलतापूर्वक मेज़बानी

वडोदरा (गुजरात) [भारत], 1 दिसंबर: पारुल यूनिवर्सिटी ने पीयू के इंटरनेशनल फोकलोर फेस्टिवल के तीसरे एडिशन में 30 देशों को एकत्र किया गया, जो कि यूनिवर्सिटी के अंतर्राष्ट्रीय सांस्कृतिक समझ के दृष्टिकोण की तरफ एक और कदम है। “वसुधैव कुटुम्बकम” के सदीवी मंत्र की पालना करते हुए, इस साल के इंटरनेशनल फोकलोर फेस्टिवल ने एक बार फिर दुनिया को एक...

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ST Correspondent Verified Media or Organization • 16 Apr, 2026 Team
December 1, 2025 • 5:58 PM  0
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पारुल यूनिवर्सिटी ने की अपने इंटरनेशनल फोकलोर फेस्टिवल के तीसरे संस्करण की सफलतापूर्वक मेज़बानी
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1 Dec 2025
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पारुल यूनिवर्सिटी ने की अपने इंटरनेशनल फोकलोर फेस्टिवल के तीसरे संस्करण की सफलतापूर्वक मेज़बानी
पारुल यूनिवर्सिटी ने की अपने इंटरनेशनल फोकलोर फेस्टिवल के तीसरे संस्करण की सफलतापूर्वक मेज़बानी

वडोदरा (गुजरात) [भारत], 1 दिसंबर: पारुल यूनिवर्सिटी ने पीयू के इंटरनेशनल फोकलोर फेस्टिवल के तीसरे एडिशन में 30 देशों को एकत्र किया गया, जो कि यूनिवर्सिटी के अंतर्राष्ट्रीय सांस्कृतिक समझ के दृष्टिकोण की तरफ एक और कदम है।वसुधैव कुटुम्बकमके सदीवी मंत्र की पालना करते हुए, इस साल के इंटरनेशनल फोकलोर फेस्टिवल ने एक बार फिर दुनिया को एक वैश्विक परिवार के तौर पर सांस्कृतिक सहयोग और जश्न के लिए एक मंच पर एक साथ लाया है।

इस साल, 30 से अधिक देशों से 600+ कलाकार इकट्ठा हुए। भारत, लिथुआनिया, पोलैंड, नेपाल, दक्षिण कोरिया, स्लोवाकिया, ग्रीस, रूस, क्यूबा, श्रीलंका, स्पेन, इक्वाडोर, अल्जीरिया, मलेशिया, किर्गिस्तान, कज़ाकिस्तान, कराकल्पकस्तान, इथियोपिया, लेसोथो, मेडागास्कर, तंजानिया, दक्षिण सूडान, ज़ाम्बिया, मोज़ाम्बिक, भूटान, ज़िम्बाब्वे, म्यांमार, बांग्लादेश, युगांडा और घाना के डैलिगेटों ने कैंपस को अपनी लय, रंग और विरासत से भर दिया, क्योंकि प्रत्येक ग्रुप अपनी खास पहचान लेकर आया, और अलग-अलग महाद्वीपों की परंपराओं, कहानियों और आर्ट फॉर्म्स का जीता-जागता मोज़ेक बनाया।

इस उत्सव का शानदार उदघाटन 25 नवंबर को स्टैच्यू ऑफ़ यूनिटी पर किया गया। दुनिया भर के कलाकार दुनिया की सबसे बड़ी मूर्ति के बैकग्राउंड में ग्लोबल यूनिटी और शांति की शपथ लेने के लिए एकत्र हुए। यह पल सरदार वल्लभभाई पटेल को श्रद्धांजलि के तौर पर पेश किया गया और इस उत्सव के साझे उदेश - एकता, आपसी सम्मान और एक बेहतर दुनिया की चाहत को दिखाता था। पांच दिनों के दौरान, पारुल यूनिवर्सिटी कैंपस एक रंगीन सांस्कृतिक स्थान बन गया। हर देश के खास लोकगीत, सांस्कृतिक रस्में और रंगीन डांस ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध और हैरान कर दिया। इस उत्सव में अलग-अलग सांस्कृति को कला की वैश्विक भाषा के ज़रिए एक साझी जगह मिली।

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