Shivshakti Anugrah Pith - परम पूज्य Prashant Maharaj Ji के पावन सान्निध्य में
लखनऊ (उत्तर प्रदेश), मार्च 25: सनातन धर्म केवल एक आस्था नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक दिव्य पद्धति है, जो आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का मार्ग दिखाती है। युगों-युगों से ऋषि-मुनियों, संतों और महापुरुषों ने इस पवित्र परंपरा को अपने तप, त्याग और सेवा से जीवंत रखा है। आज उसी दिव्य परंपरा को आगे बढ़ाने का कार्य श्री शिवशक्ति...
लखनऊ (उत्तर प्रदेश), मार्च 25: सनातन धर्म केवल एक आस्था नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक दिव्य पद्धति है, जो आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का मार्ग दिखाती है। युगों-युगों से ऋषि-मुनियों, संतों और महापुरुषों ने इस पवित्र परंपरा को अपने तप, त्याग और सेवा से जीवंत रखा है। आज उसी दिव्य परंपरा को आगे बढ़ाने का कार्य श्री शिवशक्ति अनुग्रह पीठ कर रही है, जो परम पूज्य प्रशांत महाराज जी के पावन सान्निध्य में धर्म, सेवा और साधना का एक अद्भुत केंद्र बन चुका है।
इस पीठ का मूल भाव अत्यंत सरल, किन्तु गहन आध्यात्मिक सत्य से परिपूर्ण है —
“महाराज जी की सेवा ही शिवत्व है।”
अर्थात गुरु की सेवा ही भगवान शिव की साक्षात आराधना है। जब मनुष्य निस्वार्थ भाव से सेवा करता है, तो वही सेवा साधना बन जाती है और वही साधना शिवत्व की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करती है।