भोजासर में किसान धरने में शामिल हुए विधायक हरीश चौधरी, मुआवजे की मांग तेज

बाड़मेर के भोजासर में हाईटेंशन ट्रांसमिशन लाइनों से प्रभावित किसानों के अनिश्चितकालीन धरने में विधायक हरीश चौधरी शामिल हुए। उन्होंने पारदर्शी मुआवजा नीति की मांग की।

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ST Correspondent Verified Media or Organization • 16 Apr, 2026 Team
March 1, 2026 • 2:21 PM  0
राजस्थान
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भोजासर में किसान धरने में शामिल हुए विधायक हरीश चौधरी, मुआवजे की मांग तेज
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1 Mar 2026
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भोजासर में किसान धरने में शामिल हुए विधायक हरीश चौधरी, मुआवजे की मांग तेज
भोजासर में किसान धरने में शामिल हुए विधायक हरीश चौधरी, मुआवजे की मांग तेज

बाड़मेर जिले के बायतु उपखंड के भोजासर गांव में किसानों का अनिश्चितकालीन धरना अब और मजबूत हो गया है। पूर्व कैबिनेट मंत्री और वर्तमान बायतु विधायक हरीश चौधरी ने धरने में शामिल होकर किसानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े होने का संकल्प लिया। यह आंदोलन उन हजारों किसानों की पीड़ा की आवाज है, जिनकी कृषि भूमि और आजीविका पर 400 केवी एवं 765 केवी क्षमता की हाईटेंशन विद्युत ट्रांसमिशन लाइनों के निर्माण से गहरा असर पड़ रहा है।

स्थानीय किसानों ने कई दिनों से इस धरने को जारी रखा हुआ है, जिसमें वे अपनी सहमति के बिना खेतों और आवासीय क्षेत्रों के ऊपर से गुजर रही इन उच्च वोल्टेज लाइनों के निर्माण पर रोक लगाने और उचित मुआवजे की मांग कर रहे हैं। विधायक हरीश चौधरी ने धरनास्थल पर पहुंचकर किसानों से लंबी बातचीत की और उनकी हर मांग को पूरी तरह जायज करार दिया। उन्होंने कहा कि विभिन्न कंपनियां बिना किसानों की रजामंदी के काम आगे बढ़ा रही हैं, जिससे भूमि की उपयोगिता, परिवारों की सुरक्षा और खेती-बाड़ी पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।

चौधरी ने खास तौर पर मुआवजा निर्धारण की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि एक ही तरह की भूमि के लिए अलग-अलग किसानों को अलग-अलग राशि मिल रही है, जो न केवल अन्यायपूर्ण है बल्कि पारदर्शिता की कमी को भी उजागर करती है। बाजार मूल्य के मुकाबले दी जाने वाली राशि नाममात्र की है और वार्षिक किराया दरें भी बेहद कम तय की गई हैं। इससे किसानों में गहरा असंतोष फैला हुआ है। विधायक ने आरोप लगाया कि प्रशासन कंपनियों के इशारे पर काम कर रहा है और विरोध करने वाले किसानों पर दबाव बनाया जा रहा है। कई जगहों पर बिना पूर्व सूचना के सर्वे और कार्यवाही हुई, जबकि विरोध पर पुलिस बल की भारी तैनाती और गिरफ्तारियां लोकतंत्र के खिलाफ कदम हैं।

उन्होंने याद दिलाया कि यह मुद्दा पहले भी राजस्थान विधानसभा में उठ चुका है। उन्होंने खुद केंद्र और राज्य सरकार के ऊर्जा मंत्रालय के अधिकारियों से बात की है, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला। चौधरी ने प्रशासन से अपील की कि वह संवेदनशीलता दिखाते हुए किसानों की मांगों पर जल्द फैसला ले, वरना यह छोटा आंदोलन बड़े जनआंदोलन में बदल सकता है।

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