रिया ने परफ्यूम मार्केट में 2025 तक 20% मार्केट शेयर का लक्ष्य रखा, हर चैनल पर विस्तार की बड़ी योजना
नेल्सन आईक्यू रिटेल आडिट रिपोर्ट जनवरी-दिसंबर 2021 के अनुसार ई-कामर्स रेवन्यू को छोड़ दें तो भारत में परफ्यूम की इंडस्ट्री लगभग 790 करोड़ रूपए की है।
भारत की 25 वर्ष पुरानी नंबर वन परफ्यूम ब्रांड रिया का वैल्यू शेयर 10.8% हैः निल्सन आईक्यू रिटेल आडिट
रिपोर्ट, जनवरी-दिसंबर 2021
मुंबई/नई दिल्ली: 2022- 25 वर्ष पुरानी भारत की मशहूर परफ्यूम ब्रांड रिया ने कोविड महामारी की चुनौतियों के बावजूद 80 करोड़ रूपए का टर्नओवर किया है। यह इतिहास कंपनी ने वित्त-वर्ष 2021-2022 में बनाया है।
कंपनी की स्थापना कोलकता में 1997 में की गई थी तबसे रिया को भारत की सबसे मशहूर परफ्यूम कंपनी में गिना जाता है। इसे भारत में वैल्यू शेयर के आधार पर लगातार तीसरे साल, परफ्यूम सेगमेंट की लीडर की मान्यता मिली है। यह मान्यता प्रतिष्ठित निल्सन आईक्यू रिटेल आडिट रिपोर्ट, जनवरी-दिसंबर 2021 में दी गई है।
नेल्सन आईक्यू रिटेल आडिट रिपोर्ट जनवरी-दिसंबर 2021 के अनुसार ई-कामर्स रेवन्यू को छोड़ दें तो भारत में परफ्यूम की इंडस्ट्री लगभग 790 करोड़ रूपए की है। माना जाता है कि वर्ष 2025 तक यह इंडस्ट्री बढ़कर 1200 करोड़ रूपए तक पहुंच जाएगी (ई-कामर्स सहित)। इस घरेलू ब्रांड जिसकी पूरी भारत में पहुंच है, बढ़ती हुई परफ्यूम इंडस्ट्री में वर्ष 2025 तक अपना मार्केट शेयर 20% तक करते हुए अपना टर्नओवर 240 करोड़ रूपए तक करना चाहती है।
पर्पस प्लेनट के संस्थापक और सीईओ श्री आदित्य विक्रम डागा का कहना है, “भारत की परफ्यूम विशेषज्ञता का इतिहास लगभग 300 साल पुराना है। भारत का सामान्य आदमी भी खूशबुओं के तमाम प्रकारों से परिचित रहता है, इसमें जब मजबूत सांस्कृतिक कारणों को जोड़ देते हैं तब भारतीय परफ्यूम एक अनोखा रूप प्राप्त कर लेता है। परफ्यूम को लेकर पश्चिमी जगत का जो आइडिया है वह लक्जरी और रोमांटिक परफ्यूम का है जिसको महंगा होने के कारण सभी भारतीय ग्राहक इस्तेमाल नहीं कर सकते। रिया ने अच्छे ढंग से भारतीय दृष्टिकोण से अपना मूल्य स्थापित कर लिया है और ओलफैक्टरी का जो ज्ञान है वह मैट्रो शहरों के साथ-साथ टीयर 1, 2 और 3 के बाजारों की संवेदनाओं को समझता है।”
उन्होंने आगे कहा, “आज परफ्यूम का इस्तेमाल निजी तौर पर लोग ज्यादा करने लगे हैं और इसकी उपयोगिता सिर्फ खास मौकों पर इस्तेमाल करने तक सीमित नहीं रह गई है। ब्रांड के सामने इस समय मुख्य चुनौती व्यापक तौर पर परफ्यूम के असंगठित बाजार की है जो टीयर 2 और 3 शहरों के बाजार हैं। सही ग्लोबल ब्रांड रोजमर्रा के इस्तेमाल के लिए काफी महंगे हैं और इसका इस्तेमाल आम आदमी के पहुंच से बाहर है, इसलिए इनमें से ज्यादातर ब्रांडों का इस्तेमाल विशेष अवसरों पर ही किया जाता है। हम इसी स्पेस (जगह) को भरने की कोशिश में हैं जो ग्लोबल ब्रांडों से छूटी हुई है।”