गौरैया संरक्षण के लिए रजत सिनर्जी फाउंडेशन और जोसेफ बर्नहार्ट ने बनाए प्राकृतिक स्वरूप में घोंसले

वाराणसी : गौरैया विश्व के लगभग सभी देशों में पाई जाने वाली पक्षियों की सबसे पुरानी प्रजाति है। जो आज विलुप्त होने के कगार पर पहुंच गई है, जैसे कि हम अपने कला, संस्कृति, संस्कार व परम्परा को संजोने के लिए प्रयत्नशील है। ये गौरैयां भी हमारी संस्कृति का हिस्सा है, जिसके संरक्षण की जरूरत […]

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ST Correspondent Verified Media or Organization • 16 Apr, 2026 Team
April 1, 2024 • 3:40 PM  0
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गौरैया संरक्षण के लिए रजत सिनर्जी फाउंडेशन और जोसेफ बर्नहार्ट ने बनाए प्राकृतिक स्वरूप में घोंसले
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1 Apr 2024
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गौरैया संरक्षण के लिए रजत सिनर्जी फाउंडेशन और जोसेफ बर्नहार्ट ने बनाए प्राकृतिक स्वरूप में घोंसले
गौरैया संरक्षण के लिए रजत सिनर्जी फाउंडेशन और जोसेफ बर्नहार्ट ने बनाए प्राकृतिक स्वरूप में घोंसले
वाराणसी : गौरैया विश्व के लगभग सभी देशों में पाई जाने वाली पक्षियों की सबसे पुरानी प्रजाति है। जो आज विलुप्त होने के कगार पर पहुंच गई है, जैसे कि हम अपने कला, संस्कृति, संस्कार व परम्परा को संजोने के लिए प्रयत्नशील है। ये गौरैयां भी हमारी संस्कृति का हिस्सा है, जिसके संरक्षण की जरूरत है। मई 2023 में रजत सिनर्जी फाउंडेशन ने वादा किया था कि जल्द ही गौरैयाओं के संरक्षण के लिए प्राकृतिक स्वरूप में घोसलों की स्थापना की जाएगी। आज फाउंडेशन द्वारा किये गये वादे को पूरा करते हुए सुखद अनुभूति हो रही है। उक्त बातें रजत सिनर्जी फाउंडेशन की डायरेक्टर प्रगति पाठक ने सामनेघाट स्थित राम छटपार शिल्प न्यास (कला संग्रहालय) में कही। अवसर था गौरैयाओं के संरक्षण के लिए रजत सिनर्जी फाउंडेशन के सहयोग से आस्ट्रियान कलाकार जोसेफ बर्नहार्ट द्वारा प्राकृतिक स्वरूप में घोसलों को मूर्त रूप देने का।
उन्होने कहा कि एक वक्त था जब हमारी नींद गौरैयाओं के कोलाहल  से खुलती थी। एक ऐसा पक्षी जों मनुष्य के आसपास रहना पसंद करती है, जो आज अपने स्तित्व के लिए संघर्ष कर रही है, जिस मानव समुदाय पर इस नन्ही चिड़िया ने भरोसा किया, उसी मानव समुदाय ने अपने भौतिक सुख के लिए गौरैयां को विलुप्त होने की राह पर ढकेल दिया है। अगर हम अब भी नही चेते तो वह दिन दूर नही जब मानव जीवन का सबसे पुराना साथी और सहयोगी सिर्फ किताब के पन्नों, किस्से कहानी और तस्वीरों में ही नजर आएगी।

इस मौके पर गौरैया के संरक्षण के लिए अग्रसर आस्ट्रियान कलाकार जोसेफ बर्नहार्ट ने बताया कि जब वे भारत आये तो प्रकृति पूजक देश भारत में भी मरती हुई गौरैयाओं के समाचार से सामना हुआ। जिससे वे बहुत ही व्यथित हो गये और लोगों को जागरूक करने उद्देश्य से उन्होने बर्ड हाउस कलाकृति में लाल रंग का उपयोग किया है। राम छटपार शिल्प न्यास (कला संग्रहालय) के संस्थापक मदन लाल गुप्ता ने राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय कलाकारों का स्वागत करते हुए कहा कि मां गंगा के किनारे स्थित इस कला संग्रहालय में गौरैया के लिए भी एक कलात्मक संग्रहाल प्राकृतिक परिवेश में बनाया गया है। जो गौरैयाओं के लिए प्राकृतिक स्वरूप में उनका घोसला है।
सूच्य हो कि मां गंगा के पावन तट पर स्थित राम छटपार शिल्प न्यास (कला संग्रहालय) उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा निजी कला संग्रहालय है। जहां कला के बहुआयामी अनुभव प्राप्त कर सकते है। यह संग्रालय मन को शान्ति प्रदान करने के साथ कला की सार्थकता को पूरा करता है।
इस अवसर पर प्रमुख रूप से रजत मोहन पाठक (सेक्रेटरी, रजत सिनर्जी फाउंडेशन) एवं जापान, स्पेन, आस्ट्रिया, स्लोवेनिया, इटली के कलाकारों सहित काफी संख्या में भारतीय कला प्रेमी व कलाकार मौजूद रहे।
भवदीय
रजत मोहन पाठक
सेक्रेटरी
रजत सिनर्जी फाउंडेशन
वाराणसी

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