शिक्षा से समाज परिवर्तन की प्रेरक कहानी
डॉ. सिद्धार्थ शंकर राजू : संघर्ष से सफलता तक की यात्रानई दिल्ली, मार्च 12 : ग्रामीण परिवेश से निकलकर शिक्षा, शोध और विद्यार्थियों के मार्गदर्शन के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान बनाने वाले डॉ. सिद्धार्थ शंकर राजू आज हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुके हैं। उनका जीवन यह दर्शाता है कि यदि व्यक्ति में दृढ़ संकल्प, मेहनत...
डॉ. सिद्धार्थ शंकर राजू : संघर्ष से सफलता तक की यात्रा
नई दिल्ली, मार्च 12 : ग्रामीण परिवेश से निकलकर शिक्षा, शोध और विद्यार्थियों के मार्गदर्शन के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान बनाने वाले डॉ. सिद्धार्थ शंकर राजू आज हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुके हैं। उनका जीवन यह दर्शाता है कि यदि व्यक्ति में दृढ़ संकल्प, मेहनत और शिक्षा के प्रति समर्पण हो, तो सीमित संसाधनों के बावजूद भी बड़ी उपलब्धियाँ हासिल की जा सकती हैं।
डॉ. सिद्धार्थ शंकर राजू का जन्म बिहार के दरभंगा जिले के कसरौर गाँव में श्री बिश्वा मोहन झा और श्रीमती सुनैना देवी के घर हुआ। साधारण ग्रामीण परिवार में पले-बढ़े डॉ. राजू ने प्रारंभ से ही शिक्षा को अपने जीवन का आधार बनाया। कठिन परिस्थितियों और सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी और धीरे-धीरे शिक्षा के क्षेत्र में एक मजबूत पहचान स्थापित की।
वर्तमान में डॉ. राजू विवेकानंद ग्लोबल विश्वविद्यालय में एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं। पिछले लगभग 17 वर्षों से वे शिक्षा के क्षेत्र में सक्रिय हैं और विद्यार्थियों के कौशल विकास, रोजगार तथा व्यक्तित्व निर्माण के लिए निरंतर कार्य कर रहे हैं। उनके मार्गदर्शन में लगभग 9000 विद्यार्थियों ने शिक्षा प्राप्त की है, जिनमें से हजारों विद्यार्थी आज देश-विदेश के प्रतिष्ठित संस्थानों और उद्योगों में कार्यरत हैं। बताया जाता है कि उनके पढ़ाए हुए लगभग 6000 विद्यार्थी विदेशों में विभिन्न संस्थानों में अपनी सेवाएँ दे रहे हैं।